DElEd 1st Semester Hindi Short Question Answer in Hindi

DElEd 1st Semester Hindi Short Question Answer in Hindi

प्रश्न 21. रेखाविधि से तात्पर्य बताइए।

उत्तर रेखाविधि से आशय यह देखा जाता है कि बच्चे कुछ रेखाएँ खींचने लगते हैं। उन्हें इस प्रकार की तिरछी, खड़ी, सीधी और खड़ी रेखाओं में एक विशेष आनन्द की

अनुभूति होती है। अतएव बच्चों से इस प्रकार की रेखाएँ आरम्भ में खिंचवानी चाहिए। जब | रेखा खींचने में उनके हाथ सधने लगें तो अक्षरों के आकार बनवाने चाहिए। इसे ही रेखाओं द्वारा अक्षर सिखाने की विधि कहा जाता है।

प्रश्न 22. मॉण्टेसरी विधि को समझाइए।

उत्तर–मॉण्टेसरी पद्धति में छोटे बच्चों को लिखने की शिक्षा देने हेतु तीन विधियों का प्रयोग किया जाता है

(i) सर्वप्रथम बच्चे को लेखनी पकड़वाने का अभ्यास कराया जाता है। यह अभ्यास कार्य कागज या पट्टी पर रेखागणित की विभिन्न आकृतियाँ खींचकर उनमें लेखनी के द्वारा । स्याही भरवाकर ही किया जाता है।

(ii) बालकों को अक्षरों का स्वरूप बतलाने हेतु रेगमाल कागज का प्रयोग किया जाता । है। रेगमाल पर अक्षरों का स्वरूप बना रहता है। बच्चे अक्षरों के बने हुए आकार पर उँगली । फेरते हैं।

(iii) धीरे-धीरे उक्त रेगमाल कागज पर उँगली फेरते-फेरते बालक उसकी ध्वनि का भी उच्चारण करने लगते हैं। इस क्रिया के द्वारा वे अक्षरों की ध्वनि एवं साम्य में परस्पर सम्बन्ध स्थापित करते हैं और तब वे स्वत: लिखना आरम्भ करते हैं।

प्रश्न 23. पेस्टालॉजी विधि का परिचय दीजिए। |

उत्तर–पेस्टालॉजी विधि में बालक को सरल से जटिल की ओर ले जाया जाता है। उनको सर्वप्रथम अक्षरों का ज्ञान कराया जाता है। अक्षरों की आकृतियाँ विभिन्न टुकड़ों में विभक्त कर ली जाती हैं। इसके पश्चात् टुकड़ों के योग से पूरे अक्षर की रचना करायी जाती है । उनको पहले वे ही वर्ण सिखाये जाते हैं जो अधिक सरल होते हैं, इसके बाद कठिन वर्णो की शिक्षा दी जाती है।

प्रश्न 24. मनोवैज्ञानिक विधि क्या है ?

उत्तर–मनोवैज्ञानिक विधि में बच्चों को पहले पूर्ण का ज्ञान कराया जाता है, इसके पश्चात् अंश का ज्ञान कराते हैं अर्थात् उन्हें सर्वप्रथम पूरे वाक्य की शिक्षा दी जाती है, इसके पश्चात् शब्द और अथन्त में अक्षरों की शिक्षा दी जाती है। एक विद्वान् ने इस सम्बन्ध में लिखा है कि “बालक जब पाठशाला में भर्ती होने आता है तो वह छोटे-छोटे वाक्यों में बोलना जानता है। वर्णमाला के विभिन्न अक्षर उसके ज्ञान हेतु निरर्थक तथा सारहीन होते हैं। उनका अपने में कोई अर्थ नहीं होता। आपस में मिलकर जब वे शब्दों या वाक्यों के रूप में

आते हैं, तभी वे सार्थक बनते हैं अर्थात् उनका अर्थ होता है।” अतएव शिक्षाशास्त्रियों ने इस विषय में जो प्रयोग किये हैं, उनके आधार पर बालकों को पहले सार्थक शब्द या वाक्य ही सिखाये जाते हैं।

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प्रश्न 25. लिखने में बैठने का ढंग तथा कागज से दूरी क्या होनी चाहिए ?

उत्तर—अच्छे आसन का लिखावट पर बहुत प्रभाव पड़ता है। अतएव कुछ भी । लिखवाना शुरू कराने के पूर्व शिक्षक को बच्चों के आसन पर ध्यान देना चाहिए। लिखने के लिए ऋण डेस्क का प्रयोग किया जाना चाहिए। शरीर जहाँ तक हो सके, सन्तुलित रखा । जाये। जाँचें कुर्सी पर सीधी रखनी चाहिए। निचला भाग पैर का लम्ब रूप में रहे। पैर का तलवा फर्श पर टिका हुआ हो। दायें हाथ से लिखा जाये तथा बायें हाथ से कागज सँभाला जाये। कापी और आँखों की दूरी कम-से-कम एक फुट की होनी चाहिए। बच्चे मेज पर झुककर न लिखें अर्थात् शिक्षकों को बच्चों को बैठने के ढंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

प्रश्न 26. वर्तनी की अशुद्धियाँ सुधारने के उपाय बताइए। (बी.टी.सी. 2016)

उत्तर – वर्तनी की अशुद्धियाँ सुधारने के उपाय

  • छात्रों से शुद्ध उच्चारण कराना।
  • कक्षा में शिक्षक द्वारा शुद्ध उच्चारण करना।।
  • कक्षा में खड़ी भाषा का प्रयोग कराना।
  • सुलेख का अभ्यास कराना।
  • अशुद्ध शब्दों का अनेक बार लिखवाकर अभ्यास कराना।
  • समान उच्चारण वाले अक्षरों के अन्तर समझाना।
  • मुद्रण की अशुद्धियों का संशोधन।
  • व्यावहारिक नियमों का ज्ञान कराना।
  • श्यामपट्ट पर लिखकर सुधार करना।
  • श्रुत लेख लिखवाना।
  • लिखते समय सावधान रहना।
  • शब्दकोश का प्रयोग कराया जाये।
  • शारीरिक दोष का निवारण करना।
  • शब्द लेखा का खेल खिलाना

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