DElEd 1st Semester Hindi Short Question Answer in Hindi

प्रश्न 27. वाचन की प्रकृति स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – वाचन की प्रकृति – वाचन वह क्रिया है जिसमें प्रतीक ध्वनि और अर्थ साथ साथ चलते हैं। एक विदेशी लेखक कैथरीन ओकानर का कहना है कि वाचन वह जटिल अधिगम प्रक्रिया है जिसमें दृश्यृ – श्रव्य एवं गतिवाही सर्किटों का मास्तिष्क के अधिगम केन्द्र से सम्बन्ध निहित होता है। जीवन में वाचन का महत्व अधिक है। इसी कारण विद्दालयों में इसकी शिक्षा को महत्व दिया जाता है।

प्रश्न 28. लेखन सामग्री का महत्व बताइए।

उत्तर – लेखन सामग्री का महत्व – साफ और सुन्दर लिखने के लिए लेखन – सामग्री का होना भी बहुत आवश्यक होता है। रायबर्न महोदय का यह मत है कि प्राथमिक स्तर पर स्लेट और बत्ती का उपयोग किया जाये तो अच्छा हैं क्योंकि इस स्तर पर स्याही का उपयोग करना उचित नहीं होता। अधिकांश विदानों का हमेशा से ही मत रहा कि आरम्भ में देवनागरी लिपि का शुभारम्भ तख्ती पर किया जाना चाहिए। तख्ती पर्याप्त चौरस एव ऐसी होनी चाहिए कि उस पर छात्र ठीक प्रकार से लिख सकें। अक्षरों को स्पष्ट, चमकीला और उभरा हुआ होना चाहिए। चमदार तेज खड़िया भी हनी चाहिए, तभी अक्षरों में चमक आती है। ऊँची कक्षाओं में निब या होल्डरों का प्रयोग किया जाना चाहिए। जहाँ तक हो सके, शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों को फाउण्टेन पेन के प्रयोग से बचने का आदेश दें।

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प्रश्न 29. कलम पकड़ने की विधि क्या होनी चाहिए?

उत्तर – कक्षा में बच्चों को इस प्रकार कलम पकड़ने का ढंग बताया जाये जिससे लिखते समय कलम अँगूठे और उँगली के बीच आ जाये। कलम का मुँह कन्धे से बाहर की ओर निकला हुआ होना चाहिए। खिलते समय हथेली का भाग स्पष्ट रूप से दिखायी देना चाहिए। कलम 45 अंश पर कटी हुई होनी चाहिए। ऐसा करने से बच्चों के लेख सुन्दर तथा सुडौल होते हैं।

प्रश्न 30. वर्तनी की अशुद्धियाँ करने के कारण बताइए।

उत्तर – वर्तनी में होने वाली अशुद्धियों के कारण – छात्र वर्तनी सम्बन्धी जो अशुद्धियाँ करते हैं, उनके नेक कारम निम्नांकित हैं-

लिखने में शीघ्रता करना।

उच्चारण की शुद्धता से वर्तनी भी अशुद्ध होगी।

सुलेख का अभ्यास न करना।

क्षेत्रीय भाषा का खराब प्रभाव।

मात्राओं के ज्ञान का अभाव।

शब्द लाघव की प्रवृति कभी वर्तनी की अशुद्धि का एक कारण है।

शरीर में होने वाले विकार भी वर्तनी की त्रुटियों के कारण हैं।

लिखते समय भावावेश के कारण मन का अशान्त होना भी एक कारण है।

पुस्तकों में मुद्रण की अशुद्धियाँ भी एक कारण हैं।

व्याकरण के ज्ञान का प्रभाव।

रूप रचना के ज्ञान की कमी।

लिपि के ज्ञान का अभाव।

लेखन में असावधानी करना।

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