DElEd 1st Semester Sanskrit Short Question Answer Sample

DElEd 1st Semester Sanskrit Short Question Answer Sample Practice Se+

DElEd 1st Semester Sanskrit Short Question Answer Sample Paper
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प्रश्न 29. संस्कृत शिक्षण में दृश्य-श्रव्य उपकरण कौन-कौन से होते हैं ?

अथवा ।

दृश्य अव्य सामग्री के एक-एक उदाहरण दें तथा उसका वर्णन करें। (डी.एल.एड. 2018-II)

उत्तर- संस्कृत शिक्षण में दृश्य-श्रव्य उपकरण।

1. दश्य साधन – वे साधन हैं जिन्हें देखकर बालक शीघ्रातिशीघ्र सीखने में सहायता प्राप्त करता है। ये दृश्य साधन हैं जिनका उपयोग शिक्षक कम खर्च तथा कम श्रम में शीघ्र सिखाने में उपयोगी पाता है। श्यामपट्ट, लपेट श्यामपट्ट, मानचित्र, मॉडल, चित्र, चार्ट, फलालेन, पट्ट, प्रतिरूप आदि सभी इसके अन्तर्गत आते हैं।

2. भव्य साधन – प्रव्य साधन वे साधन हैं जिन्हें सुनकर पाठ्यवस्तु समझने में मदद मिलती है। जैसे—टेपरिकॉर्डर एवं लिंग्वाफोन। शुद्ध उच्चारण एवं आदर्श वाचन के लिए ये नितान्त उपयोगी हैं। तुलनात्मक वाचन के अन्तर को जानने के लिए टेप से बहुत सहायता मिलती है। कभी कभी आकाशवाणी एवं टी.वी. पर भी ‘संस्कृत नाटकों’ एवं ‘देववाणी कार्यक्रम’ आदि का प्रसारण भी बालकों को प्रेरणा देने का कार्य करते हैं।

३. दुश्य-श्रव्य उपकरण — ये वे उपकरण हैं जो दिखाई भी देते हैं तथा सुनाई भी देते हैं; उदाहरणार्थ-टी.वी. पर प्रसारित शैक्षिक चित्र, नाटक शिक्षाप्रद, फिल्म स्ट्रिप आदि उपकरण इसके अन्तर्गत आते हैं। सीखने का वह सामान्य नियम है कि उसके लिए जितनी ही अधिक इन्द्रियाँ क्रियाशील होंगी उतना ही सीखना शीघ्र तथा चिरस्थायी होगा।

प्रश्न 29. आदर्श वाचन से आप क्या समझते हैं ? (बी.टी.सी. 2016)

अथवा

आदर्श वाचन एवं अनुकरण वाचन से आप क्या समझते हैं ? (बी.टी.सी. 2016)

उत्तर आदर्श वाचन – शिक्षक द्वारा किया जाने वाला वाचन आदर्श वाचन कहलाता है क्योंकि यह बालक हेतु वाचन के आदर्श रूप में होता है। अतः शिक्षक को सुन्दर वाचन में ध्यान देने योग्य बातों का ध्यान रखते हुए वाचन करना चाहिए जिससे बालक को वाचन हेतु उचित मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। यदि अध्यापक द्वारा किये गये वाचन में त्रुटियाँ रहती हैं और वाचन के घटकों का ध्यान नहीं रखा जाता है तो उसे आदर्श वाचन नहीं कहा जाएगा। शिक्षक द्वारा किये गये वाचन को आदर्श वाचन इसलिए कहा जाता है कि अध्यापक वाचन में कोई त्रुटि नहीं करेगा तथा वाचन के घटकों का ध्यान रखते हुए वास्तव में बालकों के सामने आदर्श वाचन प्रस्तुत करेगा।

अनुकरण वाचन      – अनुकरण वाचन छात्रों द्वारा किया जाता है। इसे अनुकरणीय वाचन इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें छात्र शिक्षक द्वारा किये गये वाचन के अनुसार वाचन करने का प्रयास करते हैं। अनुकरण वाचन के दो भेद हैं

  • व्यक्तिगत वाचन, (ब) समवेत वाचन।

प्रश्न 30. अनुकरण वाचन एवं सस्वर वाचन से आप क्या समझते हैं ?  (बी.टी.सी. 2015)

उत्तर – अनकरण वाचन—छात्रों द्वारा किया जाने वाला वाचन जो शिक्षक के आदर्श वाचन के पश्चात् किया जाता है।

सस्वर वाचन – उचित लय के अनुसार सुन्दर एवं शुद्ध स्वर के साथ पढ़ा जाता है।

प्रश्न 31.  संरकत में आप की पाल यो य की पाठ योजना बनाते समय आप क्या ध्यान रखेंगे?

संरकत में आप की पाठ योजना बनाते समय गा शिक्षण का महत्व ध्यान में रखना आश्यक है। गद्द शिक्षण का महत्व इस प्रकार है –

(i) गद्द के माध्यम से एक दूसरे के विचारों को शीघ्र तथा सही रूप में सरलता याण किया जा सकता है।

(ii) शोक हर्ष आदि भावों को एक दूसरे के सम्मुख गद्य के माध्यम से व्यक्त कि जा सकता है।

(iii) गहा शिक्षण ज्ञान वृद्धि का एक सफल साधन है।।

(iv) गद्य शिक्षण द्वारा बालक को कम समय में अधिक पढ़ने तथा समझने का अभ्यास कराया जाता है।

(v) गहा शिक्षण द्वारा विभिन्न शैलियों का ज्ञान कराया जाता है।

(vi) बालकों में शब्दकोश में वृद्धि गच्च शिक्षण द्वारा ही होती है।

(vii) गद्य शिक्षण से बालक को पठन कला के योग्य बनाया जा सकता है।

(viii) गद्य शिक्षण से बालक क्रियाशील बनते हैं। गच्च शिक्षण से बालकों में स्वस्थ प्रवृत्ति का विकास होता है।

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