DElEd 1st Semester Science 3rd 4th Science Short Question Answer Paper

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प्रश्न 29.निषेचन क्या है ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-निषेचन (Fertilisation)-बीजाण्ड के अणकोष में प्रवेश करने के पश्चात् पराग नलिका का शीर्ष गल जाता है तथा इसमें उपस्थित नलिका केन्द्रक भी लुप्त हो जाता है। दोनों नर युग्मक अब भ्रूणकोष के जीवद्रव्य में मुक्त हो जाते हैं तथा इसमें से एक अण्णकोशिका में घुसकर उसके केन्द्रक के साथ संलयित हो जाता है । इस प्रकार मुख्य निषेचन क्रिया खत्म हो जाती है।

इससे युग्मजन (Zygote) का निर्माण होता है। यह युग्मजन आगे चलकर Jण दूसरा नर, युग्मक दोनों ध्रुवीय केन्द्रकों (या द्विगुणित केन्द्रक) के साथ संलग्न करके एक गणत। केन्द्रक निर्मित करता है, जिसे प्राथमिक प्रणपोप केन्द्रक कहते हैं। इस क्रिया को ।। संलयन कहते हैं। प्राथमिक भ्रूणकोष केन्द्रक बार-बार विभाजित हो जाता है तथा इस फलस्वरूप सभी केन्द्रकों के चारों ओर भित्तियाँ बन जाती हैं। इस प्रकार जो ऊतक बनता । उसे भ्रणपोष कहा जाता है। भ्रूणपोष में भोज्य पदार्थ एकत्रित हो जाता है। यह शृण । परिवर्धन के समय उसे पोषण प्रदान करता है । दोहरा निषेचन होने के कारण हो । बीजियों की यह क्रिया द्विनिषेचन कहलाती है।

प्रश्न 30. किण्वन या है ? किण्वन तथा अनॉक्सी वमन में अन्तर बताइए ।

उत्तर किण्वन – किण्वन  यह प्रकिया है जो ऑक्सीजन की अनुपथति में होती हैं। तथा ग्लुकोज अपूर्ण करण  ऑक्सीजन होता है जिसके परिणामस्वरुप पथिल ऐक्लोहॉल का निर्माण होता है। किण्वन  की अभिक्रिया जीवित कोशिका के बाहर होती हैं।

C6H12+H2O                  जाइलम        C2H5OH + CO2 + ऊर्जा

ग्लूकोज                              ऐल्कोहॉल

किण्वन की प्रक्रिया जाल एन्जाइम की उपस्थिति में होता है। जाइलम एन्जाइम यीस्ट कोशिका में पाया जाता है।

प्रश्न 31. प्रकाश संश्लेषण क्या है ? इसकी क्रियाविधि को बताड़ा।

उत्तर प्रकाश संश्लेषण को वह क्रिया कह सकते हैं जिसमें पौधों के हो भाग हरित लवक की उपस्थिति में सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को ग्रहण कर वायु से ली गयी कार्बन डाइऑक्साइड गैस (C),) तथा मृदा से शोषित जल (11,O) द्वारा खाद्य पदार्थों (कार्बोहाइड्रेट) का निर्माण करते हैं और ऑक्सीजन (O)) गैस को निष्कासित करते हैं।

प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि (Mechanism of Photosynthesis)

प्रकाश संश्लेषण एक ऑक्सीकरण अपचयन क्रिया है जिसमें जल का ऑक्सीकरण (oxidation) ऑक्सीजन (O)) में तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO) का अपचयन (Reduction) शर्करा (कार्बोहाइड्रेट) अर्थात् भोज्य पदार्थ के निर्माण में होता है।

प्रकाश संश्लेषण क्रिया में दो प्रमुख प्रावस्थाएँ (Phases) पायी जाती हैं1. प्रकाश रासायनिक प्रतिक्रिया (Photo-chemical Reaction) 2. रासायनिक प्रकाशहीन प्रतिक्रिया (Chemical Dark Reaction)।

(i) प्रकाश-रासायनिक प्रतिक्रिया (Photochemical Reaction)-यह क्रिया प्रकाश प्रतिक्रिया या हिल प्रतिक्रिया भी कहलाती है। यह क्रिया हरितलवक के ग्राना में पूरी होती है। इस क्रिया में ऑक्सीजन (O)) जल से प्राप्त होती है और कार्बन डाइऑक्साइड (CO,) के अपचयन के लिए इलेक्ट्रॉन भी जल से प्राप्त होते हैं। इस क्रिया में प्रकाश की उपस्थिति अनिवार्य है।

प्रकाश प्रतिक्रिया भी दो पदों में पूरी होती है(अ) प्रकाश-कर्म I, (ब) प्रकाश-कर्म II.

( अ ) प्रकाश-कर्म I (Photoact I)-इस क्रिया में पर्णहरिम, फोटॉन की क्वाण्टम ऊर्जा को अवशोषित करके उत्तेजित हो जाता है तथा इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन होता है। ये उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन एक पदार्थ आयरन-सल्फर प्रोटीन ग्राही द्वारा ग्रहण कर लिये जाते हैं और साइटोक्रोम-F से होते हुए पुन: पर्णहरिम में वापस आ जाते हैं। इस प्रकाश कर्म में ऊर्जा ATP के रूप में संचित रहती है क्योंकि इस क्रिया में पर्णहरिम से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन्स पुनः। पर्णहरिम में वापस चले जाते हैं इसलिए इस प्रक्रिया को चक्रीय प्रकाश फॉस्फोरिलेशन।

(Cyclic Protophosphorylation) कहा जाता है। इस प्रकाश-कर्म में न तो जल का अपचयन होता है और न ही ऑक्सीजन मुक्त होती है। प्रकाश-कर्म 1 में प्रकाश-कर्म 2 मुक्त हाइडोजने NADP वारा ग्रहण कर ली जाती है जिससे NADP.2H का निर्माण होता

(ब) प्रकाश-कर्म ॥ (Photoact II)-इस क्रिया में पर्णहरिम, फोटॉन को क्वाण्टम ऊर्जा को अवशोषित करके उत्तेजित हो जाता है एवं इलेक्ट्रॉन्स का उत्सर्जन होता है। ये उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन्स एक पदार्थ ‘Q’ द्वारा ग्रहण कर लिये जाते हैं और इलेक्ट्रॉन्स तन्त्र से भ्रमण करते हुए प्रकाश-कर्म I के पर्णहरिम से संयुक्त होते हैं। इस प्रकाश-कर्म में ऊर्जा ATP के रूप में संचित होती है, क्योंकि इस कर्म में पर्णहरिम से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन्स वर्णक तन्त्र में वापस नहीं जाते इसलिए इस प्रक्रिया को अचक्रीय प्रकाश फॉस्फोरिलेशन कहा जाता है। इस कर्म में जल का अपचयन होता है और ऑक्सीजन वायुमण्डल में विसरित हो जाती

(ii) रासायनिक प्रकाशहीन प्रतिक्रिया (Chemical Dark Reaction)–यह क्रिया प्रकाशहीन प्रतिक्रिया अथवा ब्लैकमैन प्रतिक्रिया भी कहलाती है। इस क्रिया के लिए प्रकाश की जरूरत नहीं होती और यह क्रिया हरित लवक के स्ट्रोमा (Stroma) भाग में सम्पन्न होती है। इस क्रिया में प्रकाश रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा निर्मित ATP तथा NADP.2H ऊर्जा वाहकों का स्ट्रोमा में प्रवेश होता है तथा अधिक ऊर्जायुक्त कार्बन पदार्थों अर्थात् कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है।

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