DElEd 1st Semester Science 3rd 4th Science Short Question Answer Paper

DElEd 1st Semester Science 3rd 4th Science Short Question Answer Paper

प्रश्न 35. यौगिक क्या है ? इसकी विशेषताएँ बताइए।

उत्तर–दो अथवा दो से अधिक तत्वों के रासायनिक संयोग से मिलकर निर्मित पदार्थ को यौगिक कहते हैं। यौगिक में उनके अवयवी तत्वों के परमाणुओं की संख्या का अनुपात नियत होता है, जैसे-नमक (NaCl) में एक परमाणु सोडियम तथा एक परमाणु क्लोरीन का होता है। अत: इनमें 1 : 1 का अनुपात होता है। इसी प्रकार जल में हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन का रासायनिक संयोग द्रव्यमान के आधार पर 1 : 8 के अनुपात में होता है। यौगिकों की विशेषताएँ (Characteristics of Compounds) | यौगिकों की निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं

(i) यौगिक का रासायनिक संघटन निर्धारित एवं स्थिर होता है अर्थात् एक यौगिक में उसके अवयव तत्वों के परमाणुओं की संख्या एवं तत्वों का द्रव्यमान एवं निश्चित अनुपात में । होता है।

(ii) यौगिक समांगी होते हैं अर्थात् यौगिक के प्रत्येक भाग में उसकी सभी विशेषताएँ। पायी जाती हैं।

(iii) यौगिक के गुण एवं अवयव तत्वों के गुणों से भिन्न होते हैं।

(iv) यौगिकों का गलनांक निश्चित होता है।

(V) प्रत्येक यौगिक के भौतिक एवं रासायनिक गुण निश्चित होते हैं।

(vi) यौगिक का क्वथनांक निश्चित होता है।

(vii) यौगिक के अवयव तत्वों को साधारण भौतिक विधि के द्वारा अलग नहीं किया जा सकता है।

(viii) यौगिक बनने की प्रक्रिया में प्रायः या तो ऊष्मा, प्रकाश था विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है अथवा अवशोषित होती है।

प्रश्न 36. मिश्रण क्या है ? यह कितने प्रकार का होता है तथा इसकी विधियों को बताइए।

उत्तर–जब दो अथवा दो से अधिक द्रव्यों को किसी भी अनुपात में मिश्रित कर दिया। जाता है तो तैयार पदार्थ को मिश्रण कहते हैं। मिश्रण के गण उसके अवयवों के गुणों के मिश्रण के रूप में दिखाई देते हैं, जैसे- शर्बत, जो पानी और चीनी मिलाकर बनाया जाता है। इसमें पानी के भी गुण होते हैं और चीनी के भी गुण पाये जाते हैं। । मिश्रण दो प्रकार के होते हैं—(अ) समांगी (Homogeneous) तथा (ब) विषमांगी। (Heterogeneous) । समांगी मिश्रण उस मिश्रण को कहते हैं जिसके प्रत्येक भाग के गुण दूसरे भाग के गुणों के समान होते हैं, जैसे- शर्बत । असमांगी मिश्रण उस मिश्रण को कहते हैं। जिसके गुण अलग-अलग भागों में अलग-अलग होते हैं, जैसे–चीनी एवं नमक का मिश्रण।

1. प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)-प्रभाजी आसवन के द्वारा उन मिश्रित द्रवों को अलग करते हैं, जिनके क्वथनांकों में अन्तर बहुत कम होता है अर्थात् द्रवों के क्वथनांक एक-दूसरे के समीप होते हैं। भूगर्भ से निकाले गये कच्चे तेल में से शुद्ध पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल आदि इसी विधि द्वारा अलग किये जाते हैं। जलीय वायु (Liquid air) से विभिन्न गैसें भी इसी विधि द्वारा पृथक् की जाती हैं।

2. वर्णलेखन (Chromatography)—यह विधि इस तथ्य पर आधारित है कि किसी मिश्रण के विभिन्न घटकों की अधिशोषण क्षमता अलग-अलग होती है तथा वे किसी। | अधिशोषक पदार्थ में विभिन्न दूरियों पर अधिशोषित होते हैं तथा इस प्रकार अलग कर लिये जाते हैं।

3. भाप आसवन (Steam distillation)– भाप आसवन के द्वारा ऐसे कार्बनिक पदार्थों को शुद्ध किया जाता है, जो जल में अघुलनशील होते हैं, परन्तु भाप के साथ वाष्पशील होते हैं। इस विधि के द्वारा विशेष रूप से उन पदार्थों का शुद्धिकरण किया जाता है। जो अपने क्वथनांक पर अपघटित हो जाते हैं। कार्बनिक पदार्थों एसीटोन, मेथिल एल्कोहॉल, एसिटल्डिहाईड आदि का शुद्धिकरण इसी विधि द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 37. मात्रक से आप क्या समझते हो ?

उत्तर–भौतिक राशि के मापन हेतु उसी राशि के एक निश्चित परिमाण को मानक मान लिया जाता है। इस मानक को ही उस राशि का मात्रक कहा जाता है।

किसी भी भौतिक राशि की माप को व्यक्त करने हेतु निम्न दो बातों की अत्यन्त आवश्यकता होती है ।

(i) मात्रक (1)–जिसमें उस भौतिक राशि की माप को व्यक्त किया जाता है।

(ii) संख्यात्मक मान (n)-जो यह व्यक्त करता है कि वह मात्रक उस भौतिक राशि में कितनी बार आया है।

उदाहरण — एक छड़ की लम्बाई 173 मीटर है। यहाँ पर भौतिक राशि लम्बाई का मात्रक मीटर तथा संख्यात्मक मान 1-73 है। यदि मात्रक सेण्टीमीटर में लिया जाए तो छड़ की लम्बाई 173 सेण्टीमीटर प्राप्त होगी और यदि मात्रक मिलीमीटर हो तो वही लम्बाई 1730 मिलीमीटर प्राप्त होगी। इससे यह ज्ञात होता है कि किसी राशि का मात्रक जितना छोटा होता है उसका संख्यात्मक मान उतना ही बड़ा होता है। भौतिकी की भाषा में हम कह सकते हैं कि किसी राशि का संख्यात्मक मान उसके मात्रक के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

Tagged with: , , , , , , , , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*