DElEd 1st Semester Science 3rd 4th Science Short Question Answer Paper

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प्रश्न 38. गति के द्वितीय नियम को बताइए।

उत्तरगति विषयक द्वितीय नियम (Motion related Second Law)-इस नियम के अनुसार संवेग परिवर्तन की दर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा यह उसी दिशा में होती है, जिसमें बल कार्यों को करता है। इस प्रकार किसी वस्तु पर आरोपित बल, उस वस्तु के द्रव्यमान तथा उसमें बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।”

यदि किसी F बल आरोपित करने पर उसमें बल की दिशा में a त्वरण उत्पन्न होता है। यदि वस्तु का द्रव्यमान m हो तो द्वितीय नियम के अनुसार,

F = ma

यदि F = 0 अर्थात् जब वस्तु पर कोई बल नहीं लग रहा है तो 4 = 0, क्योंकि द्रव्यमान 7n का मान शून्य नहीं हो सकता है। यदि त्वरण का मान शून्य है तो इसका अर्थ है कि या तो वस्तु नियत वेग से गतिमान है या विरामावस्था में है। इससे स्पष्ट है कि बल के अभाव में वस्तु अपनी गति या विराम अवस्था को बनाये रखती है। यही गति विषय द्वितीय नियम है। अत: न्यूटन का गति विषयक द्वितीय नियम, प्रथम नियम का ही एक रूप है।

न्यूटन के द्वितीय गति नियम से बल का सूत्र प्राप्त होता है इसलिए बल का मात्रक kgIm/s2 या N (न्यूटन) होता है।

प्रश्न 39. गति के तृतीय नियम को बताइए।

उत्तरगति विषयक तृतीय नियम ( या क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं का नियम ) (Motion related Third Law)-“जब कोई एक पिण्ड दूसरे पिण्ड पर बल लगाता है तो ऐसी स्थिति में दूसरा पिण्ड भी पहले पिण्ड पर उतना ही बल विपरीत दिशा में लगाता है।

या होती है। इसे ‘न्यूटन चपर्ण नियम माना जाता

अर्थात प्रत्येक क्रिया को उसके बराबर तथा विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया हो। के गति का तृतीय नियम’ कहा जाता है। यह न्यूटन का सबसे महत्वपूर्ण नि

मरे पर बल आरोपित कर ‘ है तथा पिण्ड ‘ब’ पर नियम के अनुसार,

न जाता है। क्रिया

समान

उदाहरणा_माना कि दो पिण्ड ‘अ’ तथा ‘व’ हैं जो एक-दूसरे पर व रहे हैं। यदि पिण्ड ‘अ’ पर (पिण्ड ‘ब’ द्वारा) आरोपित बल ‘फ’ है तथा (पिण्ड ‘अ’ द्वारा आरोपित) बल ‘फवा है। तब न्यूटन के तृतीय गति नियम के

अब = फवअ ।

इन दोनों बलों में से एक को क्रिया’ तथा दूसरे को प्रतिक्रिया’ कहा जाता है। तथा प्रतिक्रिया परिमाण में बराबर तथा दिशा में एक-दूसरे के विपरीत होती है। किया-प्रतिक्रिया सदैव भिन्न पिण्डों पर लगती है। अत: न्यूटन के तृतीय नियम ‘क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं का नियम’ भी कहा जाता है। | इस नियम के सम्बन्ध में दो तथ्य महत्वपूर्ण हैं

(अ) हम यह नहीं जान सकते हैं कि अमुक बल क्रिया है तथा अमुक बल प्रतिक्रिया है। हम केवल यह जान सकते हैं कि एक बल क्रिया है तथा दूसरा प्रतिक्रिया।

(ब) क्रिया तथा प्रतिक्रिया सदैव अलग-अलग पिण्डों पर लगती है, एक ही पर नहीं।

उपर्युक्त उदाहरण में एक बल फअब (क्रिया या प्रतिक्रिया) पिण्ड ‘अ’ पर लग रहा है। जबकि दूसरा फवअ (प्रतिक्रिया या क्रिया) पिण्ड ‘ब’ पर लग रहा है।

न्यूटन के तृतीय नियम के दैनिक जीवन में अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं। इनमें से प्रमुख उदाहरणों का विवरण निम्नलिखित है

(अ) बन्दूक से जब गोली छोड़ी जाती है, तो हमें पीछे की ओर झटका लगता है। इसका कारण है कि जितना बल बन्दूक गोली पर लगाती है, उतनी ही तेजी से हमें झटका लगता है।

(ब) घोड़ा गाड़ी को खींचते समय अपनी पिछली टाँगों से पृथ्वी को पीछे की ओर दबाता है जिससे प्रतिक्रियास्वरूप पृथ्वी घोड़े पर आगे की ओर बल लगाती है तथा गाड़ी आगे बढ़ती जाती है। इसी प्रकार जब कोई व्यक्ति नौका से कूदता है, तो वह अपने पैरों से बल लगाकर नाव को पीछे की ओर धकेलता है, जिसके फलस्वरूप नौका भी व्यक्ति पर आगे की ओर बल लगाती है तथा व्यक्ति किनारे पहुँच जाता है।

न्यूटन के तृतीय नियम पर आधारित और भी कई उदाहरण हैं, जैसे-रॉकेट का आगे बढ़ना, कुएँ से पानी खींचते समय रस्सी टूट जाने पर व्यक्ति का पीछे गिर पड़ना, ऊँचाई से कूदने पर चोट लगना आदि।

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