DElEd 1st Semester Science 3rd 4th Science Short Question Answer Paper

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प्रश्न 40. गुरुत्व से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर-गुरुत्व-गुरुत्व से तात्पर्य गुरुत्वाकर्षण से होता है। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के अनुसार दो पिण्डों के मध्य का आकर्षण बल कार्य करता है। यदि इनमें से एक पिण्ड पृथ्वी हो तो इस आकर्षण बल को ‘गुरुत्व’ कहते हैं। अर्थात् गुरुत्व वह आकर्षण बल है जिसस पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केन्द्र की ओर खींचती है। यही कारण है कि मुक्त रूप से ऊपर की ओर फेंकी गई वस्तु पृथ्वी की सतह पर आकर गिरती है। अत: उल्लेखनीय है कि किसी वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वीय बल ही उसका भार कहलाता है। सर्वप्रथम आर्यभट्ट ने बताया कि पृथ्वी समस्त वस्तुओं को अपनी ओर खींचती है। | गुरुत्वीय त्वरण (Gravitational Acceleration)-गुरुत्वीय त्वरण स्वतन्त्र रूप से पथ्वी की ओर गिरती किसी वस्तु के वेग के प्रति सेकण्ड में होने वाली वृद्धि को प्रदर्शित करता है। पृथ्वी के आकर्षण बल के कारण किसी वस्तु के वेग में प्रति सेकण्ड होने वाली वृद्धि को गुरुत्वीय त्वरण g कहते हैं।

गुरूत्वीय त्वरण g

जहाँ, G = सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक है, जिसका मान 6-67 x 10 11 N-m/kg है।। g का प्रामाणिक मान 45° अक्षांश तथा समुद्र तल पर 9.8 m/sec होता है।

गुरुत्वीय त्वरण वस्तु के द्रव्यमान आदि पर निर्भर नहीं करता है, अतः यदि भिन्न-भिन्न द्रव्यमानों की दो वस्तुओं को मुक्त रूप से ऊपर से गिराया जाए तो उनमें समान त्वरण पैदा होगा तथा यदि वे एक ही ऊँचाई से गिराई जाएँ, तो वे एक साथ पृथ्वी पर पहुँचेंगी। गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी पर भिन्न-भिन्न स्थानों पर अलग-अलग होता है। भूमध्य रेखा पर। इसका मान सबसे कम तथा ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है। अतः यदि कोई व्यक्ति भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर चले तो उसके भार (द्रव्यमान x गुरुत्वीय त्वरण) में वृद्धि होती जाएगी तथा यह वृद्धि ध्रुवों पर सबसे अधिक होगी। अर्थात् पृथ्वी तल पर व्यक्ति का भार भूमध्य रेखा पर सबसे कम व ध्रुवों पर सर्वाधिक होता है।

पृथ्वी तल से ऊपर या नीचे जाने पर गुरुत्वीय त्वरण का मान घटता जाता है। पृथ्वी के केन्द्र पर इसका मान शून्य होता है। अत: किसी वस्तु का भार पृथ्वी के केन्द्र से शून्य होता है। परन्तु द्रव्यमान वही रहता है। चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी पर इसके मान का । होता है। | पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन गति का भी गुरुत्वीय त्वरण पर प्रभाव पड़ता है। यदि पृथ्वी अपने अक्ष के परितः घूमना बन्द कर दे तो ध्रुवों के अलावा प्रत्येक स्थान पर गुरुत्वीय त्वरण के मान में एवं इसके कारण किसी वस्तु के भार में वृद्धि हो जाएगी। इसके विपरीत यदि पृथ्वी अपने अक्ष के परित: तेजी से घूमने लगे तो ध्रुवों के अलावा प्रत्येक स्थान पर वस्तुओं के भार में कमी हो जाएगी। यह कमी भूमध्य रेखा पर सबसे अधिक होगी। ज्ञातव्य है कि वस्तु का भार तो परिवर्तित होता है, किन्तु उसका द्रव्यमान निश्चित रहता है।

गुरुत्व केन्द्र (Centre of Gravity) -किसी वस्तु का गुरुत्व केन्द्र वह बिन्दु होता है। जहाँ वस्तु का सम्पूर्ण भार कार्य करता है। किसी वस्तु का भार घनत्व केन्द्र से ठीक नीचे की ओर कार्यरत रहता है। किसी पिण्ड का गुरुत्व केन्द्र तब तक स्थिर रहता है जब तक उसका आकार नहीं बदलता है।

गुरुत्वीय क्षेत्र (Gravitational Field)—प्रत्येक कण दूसरे कण को अपनी ओर आकर्षित करता है जिसे गुरुत्वाकर्षण बल कहा जाता है। कण के चारों ओर के उस स्थान को जिसमें कण के गुरुत्वाकर्षण बल का अनुभव होता है, गुरुत्वीय क्षेत्र कहा जाता है।

गुरुत्वीय क्षेत्र की तीव्रता (Intensity of Gravitational Fe) – गुरुत्वीय क्षेत्र में किसी पर  रखे किसी एकांक द्रव्यमान के पिण्ड पर जितना गुरुत्वाकर्षण बल लगता हैं उस बिन्द पर गुरुत्वीय क्षेत्र की तीव्रता कहा जाता है।

प्रश्न 41. मिश्रण और यागिक में अन्तर बताइए।

यौगिक तथा मिश्रण में अन्तर।

(Differences between Compound and Mixture)

गुण (Properties) यौगिक (Compound) मिश्रण (Mixture)
संघटन प्रत्येक येगिक का संघटन निश्चित होता है। मिश्रण का संघटन अनिश्चित होता है।
गुण यौगिक के गुण उसके अवयवी तत्वों से भिन्न होते हैं। मिश्रण के गुण उसके अवयवी तत्वों पर निर्भर करते हैं।
पृथक्करण यौगिकों के अवयवों को साधारणतया भौतिक विधियों के द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता है। मिश्रण को साधारण भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है
भौतिक गुण भौतिक गुण निश्चित होते हैं।  मिश्रण के भौतिक गुण निश्चित नहीं होते है।
शुद्धता एवं समांगता यौगिक शुद्ध एवं समांगी होते हैं। मिश्रण अशुद्ध एवं विषमांगी होते हैं।
रासानिक सूत्र योगिक का एक निर्धारित रासानिक सूत्र होते हैं। मिश्रण का कोई रासायनिक सूत्र नहीं होता है।
रासायनिक परिवर्तन यौगिकों का बनना रासायनिक परिवर्तन हैं। मिश्रण का निर्मित होना रासायनिक परिवर्तन नहीं है अपितु यह एक भौतिक परिवर्तन होता है।

प्रश्न 42. विलयन क्या है? यह कितने प्रकार का होता है?

उत्तर–विलयन (Solution)-दो अथवा दो से अधिक पदार्थों के ऐसे समांगी मिश्रण को, जिसका कोई निश्चित संगठन नहीं होता अर्थात् पदार्थों की मात्रओं का कोई निश्चित अनुपात नहीं होता, विलयन कहते हैं।

विलयनों के प्रकार (Types of Solution)-विलयन प्रमुख रूप से दो प्रकार के होते हैं –

(1) संतृप्त विलयन–संतृप्त विलयन वह होता है, जिसमें विलायक (द्रव) में विलय (ठोस) की, किसी ताप पर, अधिकतम सम्भव मात्रा उपस्थित रहती है।

यथा, यदि ताप को स्थिर रखते हुए जल में नमक को अधिकाधिक मात्रा डाली जाए तो एक स्थिति में नमक का घुलना रुक जाता है एवं कुछ ठोस नमक विलयन की तली में पा रह जाता है। जब तक विलयन में कुछ भी बिना घुले शेष न रह जाए उसे संतुष्त नहीं है।

जा सकता। इस स्थिति में विलयन में विलेय की मात्रा तथा बचे हुए विलेय की मात्रा के मध्य एक गत्यात्मक साम्य स्थापित हो जाता है जिसे निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है।

विलेय की घुली हुई मात्रा के विलेय की बिना घुली हुई मात्रा । अत: संतृप्त विलयन का लक्षण यह है कि उसके सम्पर्क में कुछ बिना घुला हुआ विलेय भी उपस्थित है। | (2) असंतृप्त विलयन वह होता है जिसमें विलेय की मात्रा उसमें घुलती जाती है, जब तक कि विलयन संतृप्त न हो जाए।

विलयन की संतृप्तता पर ताप का प्रभाव-किसी संतृप्त विलयन का यदि ताप बढ़ाया जाए, तो उसमें और अधिक विलेय घुलता जाता है अर्थात् ताप बढ़ाने के साथ-साथ विलयन अधिकाधिक असंतृप्त होता जाता है।

इसके विपरीत यदि किसी असंतृप्त विलयन को ठण्डा करके उसका ताप घटाया जाए। तो एक निश्चित ताप पर संतृप्त हो जाता है और ठण्डा करने पर विलेय तथा विलयन से पृथक् होकर बर्तन की तली में जमा होने लगता है।

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