DElEd 1st Semester Science 3rd 4th Science Short Question Answer Paper

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प्रश्न 43. पदार्थ की कितनी अवस्थाएँ होती हैं ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर–पदार्थ की अवस्थाएँ (States of matter)-प्रकृति में कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं, उनको जहाँ रखा जाए वे उसी स्थान पर उसी अवस्था में रखे रहते हैं तथा अपना आकार तथा आकृति नहीं बदलते हैं, लेकिन द्रव ऐसे पदार्थ होते हैं जिनका आकार निश्चित होता है।

लेकिन आकृति निश्चित नहीं होती है और कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिनका आकार एवं । आकृति निश्चित नहीं होते हैं। अत: पदार्थों को आकृति एवं आकार के आधार पर तीन भागों

में विभक्त कर सकते हैं। (i) ठोस (Solid), (ii) द्रव (Liquid), (iii) गैस (Gas) ।

  • ठोस अवस्था (Solid state)-ऐसे पदार्थ जिनका आयतन तथा आकृतियाँ | निश्चित होते हैं उनको ठोस पदार्थ कहते हैं. जैसे-लोहा, ताँबा, पत्थर, पीतल, बर्फ आदि। ।
  • द्रव पदार्थ (Liquid state)-वे पदार्थ जिनका आयतन निश्चित होता है, लेकिन आकार अनिश्चित होता है, उन पदार्थों को द्रव पदार्थ कहा जाता है। इन पदार्थों को जिस आकार के बर्तन में रखा जाता है उसी का आकार ग्रहण कर लेते हैं. इनका आयतन नहीं बदलता है। जैसे-जल, तेल, दूध, पारा आदि।
  • गैस अवस्था (Gas state)-वे पदार्थ जिनके आयतन एवं आकार दोनों अनिश्चित होते हैं उन पदार्थों को गैसीय अवस्था कहा जाता है। ये जिस बर्तन में रखे जाते हैं। उन्हीं का आयतन एवं आकृति ग्रहण कर लेते हैं। यथा-वायु, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि।

प्रश्न 44. न्यूटन के नियमों को बताइए।

उत्तर-हमारा गति विषयक ज्ञान तीन मूल नियमों पर आधारित होता है। इन्हें सर्वप्रथम महान वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन ने सन् 1687 में अपनी पुस्तक ‘प्रिसिंपिया’ (Principia)

में प्रतिपादित किया। इसलिए इस वैज्ञानिक के सम्मानार्थ इन नियमों को न्यूटन के गति विषयक नियम कहा जाता है। न्यूटन ने गति से सम्बन्धित तीन नियम प्रतिपादित किये थे, इनका विवरण निम्नलिखित शीर्षकों के माध्यम से समझा जा सकता हैगति विषयक प्रथम नियम (Motion related the First Law)

गति विषयक प्रथम नियम के अनुसार यदि कोई वस्तु विरामावस्था में हैं या एक सरल | रेखा में समान वेग से गतिशील रहती है तो इसकी विरामावस्था अथवा समान गति की अवस्था में परिवर्तन तभी होता है जब उस पर कोई चाहा वन लगाया जाता है। इस नियम की गैलीलियो का ‘जच’ कहते हैं। गति विपत प्रथम नियम के दैनिक जीवन में कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। इनमें से प्रमुख उदाहरणों का विवरण निम्नलिखित है

(i) हथौड़े के हत्थे को पृथ्वी पर पटकने से हथौड़ा हत्थे में कस जाता है, क्योंकि जब हम हथौड़े को ऊपर उठाकर पृथ्वी पर ऊध्र्वाधर पटकते हैं तो हथौड़ा एवं हत्था दोनों गति की अवस्था में होते हैं। हत्था तो पृथ्वी के सम्पर्क में आते ही विरामावस्था में आ जाता है,

परन्तु हथौड़ा गति के जड़त्व के कारण गतिशील ही रहता है। इसके फलस्वरूप वह नीचे | आकर हत्थे में कस जाता है।

(ii) कार या गाड़ी में असावधानी से बैठे यात्री कार अथवा गाड़ी के एकाएक चल देने | से पीछे की तरफ गिर जाते हैं। इसका कारण है कि यात्री के शरीर का निचला हिस्सा जो गाड़ी के सम्पर्क में है, गाड़ी के साथ-साथ चलने लगता है परन्तु ऊपरी हिस्सा जड़त्व के

कारण विरामावस्था में ही बना रहना चाहता है, फलतः यात्री के शरीर का ऊपरी हिस्सा पीछे | की ओर झुक जाता है।

(iii) गोली मारने से कौंच में गोल छेद हो जाता है, परन्तु पत्थर मारने पर काँच टुकड़ेटुकड़े हो जाता है, इसका कारण यह है कि गोली जब अत्यधिक वेग से कौंच से टकराती है। | तो काँच का केवल वही भाग गति में आ पाता है जिससे सम्पर्क में गोली आती है और शेष भाग विराम जड़त्व के कारण अपने स्थान पर ही रह जाता है। अत: इससे पहले की कौंच का। शेष भाग गति में आए, गोली एक स्वच्छ गोल छेद बनाती हुई निकल जाती है। इसके विपरीत यदि एक पत्थर का टुकड़ा कांच पर मारा जाता है तो उसका वेग इतना अधिक नहीं। होता कि काँच का केवल वही भाग गति में आए जो पत्थर के सम्पर्क में आता है, वरन् । उसके आस-पास का काँच भी गतिमान हो जाता है, जिससे काँच के टुकड़े-टुकड़े हो जाते

प्रश्न 45. चुम्बक के गुणों को बताइए।

उत्तर–चुम्बक के गुण-चुम्बक में मुख्यतः तीन गुण पाये जाते हैं। ।

  • आकर्षण (Attraction)- चुम्बक में धातुओं को आकर्षित करने की क्षमता होती। है। चुम्बक में लोहे, इस्पात आदि धातुओं के टुकड़े को अपनी ओर आकर्षित करने की। क्षमता होती है। यदि किसी चुम्बक को लोहे की छीलन के महीन बरादे के पास लाया जाए। तो बुरादा नमक से चिपक जाता है। चिपके हुए बुरादे की मात्रा, चुम्बक के दोनों सिरों पर सबसे अधिक एवं बीच में सबसे कम होती है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि चुम्बक की आकर्षण शक्ति उसके दोनों किनारों पर सबसे अधिक अथवा मध्य में सबसे कम होती है। चम्बक के किनारे के दोनों सिरों को चुम्बक के ध्रुव (Poles) कहा जाता है।

(ii) दिशात्मक गुण (Directional Property) यदि किसी म्बक को धागे से बाँधकर स्वतन्त्रतापूर्वक लटका दिया जाए तो उसके दोनों फिर हमेशा उत्तर दक्षिण दिशा की और संकेतित होते हैं। जो सिरा उत्तर की ओर होता है उसे चुम्बक का ‘उत्तरी ध्रुव’ (north pole) एवं जो सिरा दक्षिण की ओर होता है उसे ‘दक्षिणी ध्रुव’ (South pole) कहा जाता है। चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को N से तथा दक्षिणी ध्रुव को S से व्यक्त करते हैं।

  • ध्रुवों में आकर्षण-प्रतिकर्षण (Attraction-Antiattraction in Poles)- यदि एक चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को दूसरे चुम्बक के उत्तरी ध्रुव के पास लाया जाए तो दोनों ध्रुवों में परस्पर प्रतिकर्षण होता है तथा यदि चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को दूसरे चुम्बक के दक्षिणी ध्रुव के निकट लाया जाए तो उनमें परस्पर आकर्षण होता है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि चुम्बक के समान ध्रुवों के बीच प्रतिकर्षण एवं विपरीत ध्रुवों के बीच आकर्षण होता है। एक विलग या पृथक् (isolated) ध्रुव का कोई अस्तित्व नहीं होता। किसी चुम्बक को मध्य से तोड़ देने पर इसके ध्रुव भिन्न-भिन्न नहीं होते, बल्कि टूटे हुए ‘भाग पुन: एक पूर्ण चुम्बक बन जाते हैं तथा प्रत्येक भाग में उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव उत्पन्न हो जाते हैं। एक विलग आवेश तो स्वतन्त्र अवस्था में अस्तित्व में रह सकता है, लेकिन एक विलग चुम्बकीय ध्रुव विलगित अवस्था में नहीं रह सकता। चुम्बक के उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली रेखा चुम्बकीय अक्ष (magnetic axis) कहलाती है।

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