DElEd 1st Semester Science 3rd 4th Science Short Question Answer Paper

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प्रश्न 16. कीटों के उड़ने हेतु अनुकूलन की विशेषताएँ लिखिए।    (बी.टी.सी. 2015-II)

उत्तर- जीव यकायक यह निर्णय नहीं ले पाते हैं कि वे अपने शरीर अथवा को वातावरण के साथ बदल सकें। किसी स्पीशीज की बहुत बड़ी जनसंख्या में शायद कोई एक ऐसा जीव होता है जो दूसरों से कुछ भिन्न होगा। यह जीव अन्य जीवो वातावरणीय परिस्थितियों को अच्छी तरह सहन करने में भी हो सकता है। उदार जब कोई कीटनाशक जैसे डी. डी. टी. डाला जाता है तो बहुत सारे कीट मर जाते हैं। की उस बडी जनसंख्या में कुछ कीट ऐसे भी होते हैं जिन पर डी. डी. टी. का नहीं पड़ता है। ये कीट वृद्धि करते हैं और इनमें प्रजनन होता है। इस प्रकार प्रतिरोध के प्रजनन करने से उस क्षेत्र में शीघ्र ही प्रतिरोधक कीटों की जनसंख्या बढ़ जाती है। सन्तति पर डी. डी. टी. जैसे कीटनाशक का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसे हम वाता अनुकूलित होना कहते हैं। बहुत से कीट जन्म से ही ताप से अनुकूल रखते हैं, परन्त तथा मनुष्य में इस प्रकार का अनुकूलन नहीं होता है। |

प्रश्न 17. मरुस्थलीय पौधों की पत्तियाँ नुकीली क्यों होती हैं ? इन पौधों की विशेषताएँ क्या हैं ?

उत्तर- मरुस्थलीय पौधों की पत्तियाँ इस कारण नुकीली होती है क्योंकि पत्तियों की सतह से पानी लगातार वाष्प बनकर उड़ता रहता है। मरुस्थलों में पानी कमी के कारण वहाँ का वातावरण शुष्क होता है, अतः पत्तियों से पानी भाप बनकर उड़ न जाए, इसके लिए पत्तियाँ काँटों के रूप में बदल जाती है। इन पौधों के तने हरे तथा चपेट होते हैं और भोजन बनाने का कार्य करते हैं।

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प्रश्न 18. पत्तियों के प्रकार का नाम बताइए एवं उसके कार्यों का वर्णन कीजिए।

अथवा

पत्तियों के मुख्य कार्य लिखिए।        (बी.टी.सी. 2016)

उत्तर–पत्तियाँ प्रमुख रूप से तीन प्रकार की होती हैं

(1) संयुक्त पत्ती

(2) सरल पत्ती

(3) हस्ताकार संयुक्त पत्ती।

पत्तियों के कार्य

(1) कुछ पौधों में पत्तियाँ रंगहीन हो जाती हैं जो कीटों को आकर्षित करती है।

(2) कुछ दुर्बल पौधों में पत्तियाँ पला जन्तुओं से रक्षा होती है। 1 में पत्तियाँ प्रतान में रूपान्तरित हो जाती हैं जिनसे पौधों के

(3) कुछ पौधों में पत्तियाँ काँटों में कांटों में रूपान्तरित हो जाती हैं जिनसे पौधों की जन्तुओं से रक्षा होती है।

(4) कुछ पौधों की पत्तियों पर अपस्थानिक कलिकाएँ उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे कायिक जनन होता है।

(5) पत्तियों में रन्ध्र पाये जाते हैं जो वाष्पोत्सर्जन में सहायक होते हैं।

(6) पत्तियों में हरित लवक पाया जाता है, जिसकी सहायता से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है और पौधे अपना भोजन बनाते हैं।

प्रश्न 19. निम्न पर टिप्पणी लिखिए।

(i) पर्णाभवृन्त (Phyllode), (ii) पर्णकाय स्तम्भ (Phylloclade) । । उत्तर–(i) पर्णाभवृन्त (Phyllode)-कुछ पौधों की संयुक्त पत्तियों में पर्णफलक शीघ्र ही गिर जाता है और इसकी जगह पर्णवृन्त पत्ती सदश रचना में बदलाव हो जाता है और भोजन निर्माण का कार्य करता है; जैसे- ऑस्ट्रेलियन बबूल। पर्णाभवृन्त साधारणतया उद्रण दिशा में विकसित होता है जिससे सूर्य का प्रकाश उसकी सतह पर कम-से-कम पड़ सके। इससे वाष्पोत्सर्जन दर कम हो जाती है। । (ii) पर्णकाय स्तम्भ (Phylloclade)-कभी-कभी तना चौड़ा एवं मांसल हो जाता है।

और पत्तियों का कार्य करता है, जिसे पर्णकाय स्तम्भ कहा जाता है। पर्णकाय स्तम्भ में एक से अधिक पर्ण तथा पर्ण सन्धियाँ होती हैं; जैसे–नागफनी, रसकस।।

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