DElEd Semester 1 Science Short Question Answers Study Material Notes in Hindi

DElEd Semester 1 Science Study Material Notes in Hindi Short Question Answers

प्रश्न 34. गति के दितीय नियम को बताइए।

उत्तर – गति विषयक दितीय नियम (Motion Related Second Law)- इस नियम के अनुसार संवेग परिवर्तन की दर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होता है तथा यह उसी दिशा में होती है, जिसमें बल कार्यों को करता है। इस प्रकार किसी वस्तु पर आरोपित बाल उस वस्तु के द्रव्यमान तथा उसमें बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है।

यदि किसी F बल आरोपित करने पर उसमें बल की दिशा में a  त्वरण उत्पन्न होता है। यदि वस्तु का द्रव्यमान M हो तो दितीय नियम के अनुसार, F = ma

यदि F = 0 अर्थात् जब वस्तु पर कोई बल नहीं लग रहा हैं तो a = 0, क्योंकि द्रव्यमान m का मान शून्य नहीं हो सकता है। यदि त्वरण का नाम शून्य हैं तो इसका अर्थ है कि या तो वस्तु अपनी गति या विराम अवस्था को बनाये रखती है। इससे स्पष्ट है कि बल के अभाव में वस्तु अपनी गगति या विराम अवस्था को बनाये रखती है। यही विषय दितीय नियम हैं अत: न्यूटन का गिति विषयक दितीय नियम, प्रथम नियम का ही एक रूप है।

न्यूटन के दितीय गति नियम से बल का सूत्र प्राप्त होता है इसलिए बल का मात्रक Kgm/s2 या N (न्यूटन) होता है।

प्रश्न 35. गति के तृतीय नियम को बताइए।

उत्तर – गति विषयक तृतीय नियम (या क्रियाओं –प्रतिक्रियाओं का नियम) (Motion Related Third Law)- जब कोई एक पिण्ड दूसरे पिण्ड पर बल लगाता है  तो ऐसी स्थिति में दूसरा पिण्ड भी पहले पिण्ड पर उतना ही बल विपरीत दिशा में लगताता है अर्थात् प्रत्येक क्रिया को उसके बराबर तथा पिवरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। इसे न्यूटन के गति का तृतीय नियम कहा जाता है। यह न्यूटन का सबसे महत्वपूर्ण नियम माना जाता है।

उदाहरण – माना कि दो पिण्ड अ तथा ब हैं जो एक दूसरे पर आरोपित का रहे हैं। यदि पिण्ड अ पर (पिण्ड ब द्वारा) आरोपित बल फ अब हैं तथा पिण्ड ब पर (पिण्ड अ द्वारा आरोपित) बल फ है। दतब न्यूटन के तृतीय गति नियम के अनुसार,

फ अब = – फ बअ

इन दोनों बलों से एक को क्रिया तथा दूसरे को प्रतिक्रिया कहा जाता है। क्रिया तथा प्रतिक्रिया परिमाण में बराबर तथा दिशा में क दूसरे के विपरीत होती है। समान क्रिया प्रतिक्रिया सदैब भिन्न पिण्डों पर लगती है। अत: न्यूटन के तृतीय नियम को क्रियाओं – प्रतिक्रियाओं का नियम भी कहा जाता है।

इस नियम के सम्बनेध में दो तथ्य महत्वपूर्ण हैं –

प्रश्न 36. पदार्थ की कितनी अवस्थाएँ होती हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – पदार्थ की अवस्थाएँ (States of matter)- प्रकृति में कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं, उनको जहाँ रखा जाए वे उसी स्थान पर उसी अवस्था में रके रहते हैं तथा अपना आकार तथा आकृति नहीं बदलते है, लेकिन द्रव ऐसे पदार्थ होते हैं जिनका आकार निश्चित होते हैं लेकिन आकृति निशिचत नहीं होती हैं और कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिका आकार एवं आकृति निश्चित नहीं होते हैं। अत: पदार्थों को आकृति एवं आकार के आधार पर तीन भागों में विभक्त कर सकते हैं-

  1. ठोस (Solid),  2. द्रव  (Liquid) 3. गैस (Gas)।
  2. ठोस अवस्था (Solid State) – ऐसे पदार्थ जिनका आयतन तथा आकृतियाँ निश्चित होते हैं उनको ठोस पदार्थ कहते हैं, जैसे- लोहा, ताँबा, पत्थर, पीतल, बर्फ आदि।
  3. द्रव पदार्थ (Liquid State) – वे पदार्थ जिका आयतन निश्चित होता है, लेकिन आकार अनिश्चित होता है, उन पदार्थों को द्रव पदार्थ कहा जाता है। इन पदार्थों को जिस आकार के बर्तन में रखा जाता है उसी का आकार ग्रहण कर लेते हैं, इनका आयतन नहीं बदलता है। जैसे क- जल, तेल, दूध, पारा आदि।
  4. गैसे अवस्था (Gas state)- वे पदार्थ जिनके आयतन एवं आकार कदोनों अनिश्चित होते हैं उन पदार्थों को गैसीय अवस्था कहा जाता है। ये जिस बर्तन में रखे जाते हैं उन्हें का आयतन एवं आकृति ग्रहण कर लेते हैं। यथा वायु, नाइड्रोजन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि।

प्रश्न 37. न्यूटन के नियमों को बताइए।

उत्तर – हमारा गति विषयक ज्ञान तीन मूल नियमों पर आधारित होता है। इन्हें सर्वप्रथम महान् वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन ने सन् 1687 में अपनी पुस्तक प्रिसिंपिया (Principia) में प्रतिपादित किया। इसलिए इस वेज्ञानिक के सम्मानार्थ इन नियमों को न्यूटन के गति विषयक नियम कहा जाता है। न्यूटन ने गति से सम्बन्धित तीन नियम प्रतिपातित किये थे, इनका विवरण निम्नलिखित शीर्षकों के माध्यम से समझा जा सकता है-

गति विषयक प्रथम नियम (Motion Related the First Law)

गति विषयक प्रथम नियम के अनुसार यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है या एक सरल रेखा में समान वेग से गतिशील रहती है, तो इसकी विरामवस्था अथवा समान गति की अवस्था में परिवर्तन तभी होता है, जब उस पर कोई बाह्रा बल लगाया जाता है। इस नियम को गैलीलियों का जड़त्व कहते हैं। गति विषयक प्रथम नियम के दैनिक जीवन में उदाहरण देखने को मिलते हैं। इनमें से प्रमुख उदाहरणों का विवरण निम्नलिखित है-

  1. हथौड़े के हत्थे को पृथ्वी पर पटकने से हथौड़ा हत्थे में कस जाता है, क्योकिं जब हम हथौड़े को ऊपर उठाकर पृथ्वी पर ऊर्धाधर पटकते हैं तो हथौड़ा एवं हत्था दोनों गति की अवस्था में होते हैं। हत्था तो पृथ्वी के सम्पर्क में आते ही विरामावस्था में आ जाता है परन्तु हथौड़ा गति से जड़त्व के कारण गतिशील ही रहता है। इसके फलस्वरूप वह नीचे आकर हत्थे में कस जाता है।
  2. कार या गाड़ी में असावधानी से बैठे यात्री कार अथवा गाड़ी के एकाएक चल देने से पीछे की तरफ गिर जाते हैं। इसका कारण हैं कि यात्री के शरीर का निचला हिस्सा जो गाड़ी के सम्पर्क में है, गाड़ी के साथ साथ चलने लगता है परन्तु ऊपरी हिस्सा जड़त्व के कारण विरामावस्ता में ही बन रहना चाहता है, फलत: यात्री के शरीर का ऊपरी हिस्सा पीछे की ओर झुक जाता है।

प्रश्न 38. चुम्बक के गुणों को बताइए।

उत्तर – चुम्बक के गुण – चुम्बक में मुख्यत: तीन गुण पाये जाते हैं।

  1. आकर्षण (Attraction)- चुम्बक में धातुओं को आकर्षित करने की क्षमता होती है। चुम्बक में लोहे, इस्पात आदि धातुओं के टुकड़े को अपनी ओर आर्षित करने की क्षमता होती है। चुम्बक में लोहें, इस्पात आदि धातुओं के टुकड़े को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता होती है। यदि किसी चुम्बक को लेहें की छीलन के महीन बुरादे के पास लाया जाए तो बुरादा नमक से चिपक जाता है। चिपके हुए बुरादे की मात्रा, चुम्बक के दोनों सिरों पर सबसे अधिक एवं बीच में सबसे कम होती है।
  2. दिशात्मक गुण (Directional Property) – यदि किसी चुम्बक को धागे से बाँधकर स्वतन्त्रतापूर्वक लटका दिया जाए तो उसके दोनों सिरे हमेशा उत्तर दक्षिण दिशा की र संकेतित होते हैं। जो सिरा उत्तर का ओर होता है उसे चुम्बक का उत्तरी ध्रुव (north pole) कहा जाता है। चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को N से तथा दक्षिणी ध्रुव को S से व्यक्त करते हैं।

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