DElEd Semester 1 Science Short Question Answers Study Material Notes in Hindi

DElEd Semester 1 Science Short Question Answers Study Material Notes in Hindi

प्रश्न 4. मानक सेकण्ड क्या है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – मानक सेकण्ड (Standard Second) – मापन की समस्त पद्धतियों में समय का मानक मात्रक सेकण्ड को माना गया है। इसे संकेत से या s द्वारा व्यक्त किया जाता है।

आजकल  SI  में मान्य सेकण्ड की परिभाषा निम्नलिखित है, जो वास्तव में सन् 1967 से अभी तक चली आ रही है। 1 सेकण्ड वह समय अन्तराल हैं जिसमें परमाणुक घड़ी में सीजियम – 133 परमाणु 9192631770 कम्पन पूर्ण करता है। इससे पूर्व सेकण्ड को सौर दिवस के पदों में परिभाषित किया गया था।

जब किसी स्थान पर सूर्य अधिकतम ऊँचाई पर होता हैं तो उस क्षण को उस स्थान का मध्याह्र (या दोपहर) कहते हैं। अन्य शब्दों में एक मध्याह्र से दूसरे मध्याह्र तक के समय को एक सौर दिवस कहते हैं। पृथ्वी अपनी धुरी पर पूरा चक्कर एक सौर दिवस में लगाती है। इस सौर दिवस का मान दिन प्रतिदिन बदलता रहता है। अर्थात् ये पूरे वर्ष समान नहीं रहता है, अत: एक वर्ष में समस्त र दिवसों का औसत मान माध्य सौर दिवस (mean solar day) कहलाता है। इसे माध्य और दिवस के 86400 वें भाग को 1 सेकण्ड कहते हैं। अर्थात्

प्रश्न 5. बीजों के प्रकीर्णन से आप क्या समझते हैं? बीजों के प्रकीर्णन की प्रमुख विधियाँ कौन कौन सी हैं?

उत्तर – बीजों के प्रकीर्णन से आशय – बीजों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलने की क्रिया को बीजों का प्रकीर्णन कहते हैं।

प्रकीर्णन की विधियाँ – प्रकीर्णन की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित है-

  1. वायु द्वारा- बीजों के प्रकीर्णन हेतु हवा सबसे महत्वपूर्ण कारक है जो बीजों को उनके पैतृक पौधों से काफी दूर ले जाती है। इस प्रकार के बीजों में निम्नलिखित लक्षण पाये जाते हैं- (अ) बीज सूक्ष्म तथा हल्के होते हैं। (ब) कुछ बीजों की वायु में तैरने या उड़ने के लिए विशिष्ट संरचनाएँ होती हैं जो बीजों के प्रकीर्णन में सहायता करती है। केलोट्रोपिस एवं सेमल में रूई जैसे बालों का गुच्छा होता है।
  2. स्फुटन द्वारा (Dispersal Method) –  कुछ पौधों में फल बल के साथ फटते हैं और एक मीटर से भी अधिक दूरी पर फेंक दिये जाता है, जिसके कारण बीज पत्र सहित दूर स्थानों तक फेलों में परासरण दाब उत्पन्न हो जाता है, जिसके कारण बीज पत्र सहीत दूर स्थानों तक फेंल दिये जाते हैं। कुछ पौधे फलों एवं बीजों के प्रकीर्णन हेतु कुछ बाह्रा कारकों जैसे वायु, जल तता जन्तुओं पर निर्भर हैं।
  3. पानी द्वारा – जल के भीतर या उसके निकट उगने वाले पौधों में पलों या बीजों का विकीर्णन जल द्वारा किया जाता है। इस प्रकार जीव-जन्तु बीजों का प्रकीर्णन करते हैं।
  4. पक्षियों द्वारा – पक्षी भी बीजों के अंकुरण हेतु महत्वपूर्ण कार्य कहते हैं। पक्षी अजीर, अंगूर, आलू बुखारा, अमरूद आदि के फल खाते हैं। बीजों का पाचन नहीं होता और यह विष्ठा के साथ बाहर निकल जाते हैं। ये बीज अंकुरित हो जाते हैं जहाँ पक्षियों द्वारा बीज पहुँच जाते हा उसी स्थान पर पेड़ उग आता है।
  5. मानव द्वारा – मानव भी फसलों, फल, वृक्षों, सजावटी वृक्षों तथा पादपों के बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। इसके अतिरिक्त खाद्दन्न के साथ कुछ खरपतवारों का वितरण भी मनुष्यों द्वार अनजाने में हो जाता है।

प्रश्न 6. पौधों में अनुकूलन का विस्तृत वर्णन कीजिए।

उत्तर – विभिन्न प्रकार के वातावरण में पौधे अपने को जीवित रखने हेतु विभिन्न प्रकार की गतिविधि करते हैं, इसे पौधा का अनुकूलन कहते हैं।

अनुकूलन के आधार पर पौधे निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

जलोदभिद पौधे- जलोदभिद पौधों की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

अ)  ये पौधे जल में रहते हैं। (ब) पत्तियाँ प्राय: कटी- फटी होती हैं। (स) तना कमजोर तथा स्पंजी होता है। (द) जड़े अल्पविकसित होते हैं। (य) पौधों में पत्तियों पर श्लेष्म पाये जाते हैं जिससे य जल के प्रभाव से बचे रहते हैं। जैसे – हाइड्रिला, यूट्रीकुलेरिया कमल, सिंघाड़ा, जलकुम्भी आदि।

मरूदभिद पौधे – (अ) ये पौधे शुष्क वातावरम में पाये जाते हैं। (ब) जड़े विकसित होती है। (स) तना मोटा गूदेदार होता है। (द) पत्तियाँ नुकीली काँटों में रूपान्तरित होती है। जैसे कैक्टस (नागफनी), रसकस, बबूल आदि।

लवणोदभिद पौधे- (अ) ये पौधे खनिज लवणों की अधिकता वाले स्थानों पर जाये जाते हैं। (स) तना मोटा तथा सरस होता है। (स) पत्तियाँ मोटी एवं चमकीली होती है । (द) इनमें श्वसन जड़े पायी जाती है। जैसे –राइजोफोरा, एवीसीजिया।

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