DElEd Semester 1 Science Short Question Answers Study Material Notes in Hindi

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प्रश्न 14. पत्तियों के रूपान्तरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर – पत्तियों का रूपान्तरण – जब पत्ती के स्थान पर कोई अन्य संरचनी बनती है तो उसे पत्ती का रूपान्तरण कहा जाता है। ये संरचनाएं निम्न प्रकार की हो सकती है, जैसे

  1. पूर्ण घट (Leaf pitcher)- इसमें पूरी पत्ती या फलक का कुछ भाग घड़े के समान आकृति में परिवर्तित हो जाती है, जैसे नेपेन्थीस (napenthes) तथा डाइस्कीडिया (Dischidia) आदि में।
  2. पर्णाभवृन्त (Phyllode) – इसमें पर्ववृन्त चपटा होकर फलक का कार्य करने लगता है, जैसे- बबूल।
  3. पत्ती का प्रतान (leaf tendril)-  इसमें सम्पूर्ण पत्ती प्रतान में रूपान्तरिक हो जाती है, जैसे- स्वीट पी।
  4. पर्ण शल्क (Leaf scale) – इसमें पत्ती शल्क के जैसी पतली झिल्लीनुमा होती है, जैसे- रस्कस।

प्रश्न 15. निम्न पर टिप्पणी लिखिए-

उत्तर – 1. पर्णाभवृन्त (phyllode)- कुछ पौधों की संयुक्त पत्तियों में पर्णफलक शीर्ध ही गिर जाता है और इसकी जगह पूर्णवृन्त पत्ती सदृश रचना में बदलाव हो जाता है और बोजन निर्माण का कार्य करता है, जैसे- आस्ट्रेलियन बबूल। पर्णाभवृन्त साधारणतया उद्रण दिशा में विकसित होता है जिससे सूर्य का प्रकार उसकी सतह पर कम से कम पड़ सके। इससे वाष्पोत्सर्जन दर कम हो जाती है।

2. पूर्णकाय स्तम्भ ( Phylloclade)- कभी – कभी तना चौड़ा एवं मांसल हो जाता है और पत्तियों का कार्य करता है, जिसे पर्णकाय स्तम्भ कहा जाता है। पर्णकाय स्तम्भ में एक से अधिक पर्ण तथा पर्ण सन्धियाँ होती हैं, जैसे – नागफनी, रसकस।

प्रश्न 16. पौधों में जनन कितने प्रकार का होता है तथा लैंगिक जनन की विदियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – पौधों में पाई जाने वाली जनन विधियों को दो श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है- अलैंगिक जनन तथा लैंगिक जनन।

पादपों में अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction in Plants)- अलैगिंग जनन में हैहिक कोशिकाओं से नवीन जीव उत्पन्न होते हैं तथा जनन इकाइयां या तो बनती ही नहीं अथवा बिना अर्धसूत्री विभाजन से बनती हैं। पादपों में अलैंगिक जनन की निम विधियां पायी जाती हैं-

  1. विखण्डन (Fission)- यह एककोशकीय जीवों में पाया जाता है। इसमें कोशिका सूत्री अथवा असूत्री विभाजन द्वारा दो अथवा अधिक कोशिकाओं में विभक्त हो जाती है और संतति कोशिकाएं नया जीव बनाती है।

जीवोणओं व प्रोटोजआ में विखण्डन द्वारा जनन होता है। मलेरिया परजीवी जैसे एककोशिक प्रोटोजोआ में जनन बहुखण्डन विधि से होता है।

  • बीजाणु निर्माण (Spore Formation) – कम विकसित पादपों में दृढ़ आवण वाली विशेष एककोशिक रचनाएं बनती है, जिन्हें बीजाणु कहा जाता है। ये प्रतिकूल वातावरण में सुरक्षित रहते हैं और अनुकूल परिस्थितियाँ आने पर अंकुरित होकर नवीन पादप बनाते हैं। कवक तथा शैवाल में बीजाणु निर्माण द्वारा जनन होता है।
  • कलिकोत्पादन (Budding) – यीस्ट कोशिका से छोटे कलिका सदृश उभार अथवा मुकुल बनते है, जो कोशिका से पृथक् होकर नयी यीस्ट कोशिकाएँ बनाती हैं। यीस्ट में ये मुकुल मातृ कोशिका से अलग हुए बिना मुकुल बना लेते हैं, जिससे एक की यीस्ट कोशिका पर मुकुलों (कलिकाओं) की श्रृखला बन जाती है।
  • कायिक जनन (Vegetative Propagation) – कायिक अथवा वर्धी जनन अलैगिंग जनन की वह विधि है जिसमें पादप शरीर के किसी भी कायिक भाग से नये पौधों का विकास होता है। पौधों के किसी भी कायिक भाग से नये पौधों का विकास होता है। पौधों के निम्नलिखित भागों से कायिक जनन होत- 1 जड़ो द्वारा, 2. पत्तियों द्वारा, 3. तनों द्वारा, 4. पत्र कलिकाओं द्वारा।

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