DElEd Semester 1 Science Short Question Answers Study Material Notes in Hindi

DElEd Semester 1 Science Short Question Answers Study Material Notes in Hindi

प्रश्न 20. द्रव्य एवं ऊर्जा से क्या समझते हैं? उनकी क्रियाएँ बताइए।

उत्तर – द्रव्य (Matter) – कोई भी वस्तु जो स्थान घेरती है तथा जिसमें द्रव्यमान (mass) होता है, द्रव्य कहलाती है। उदाहरणार्थ – मेज, कुर्सी तथा दरवाजा, तीनों वस्तुएँ एक ही द्रव्य, लकड़ी से निर्मित हैं। इसमें मेज, कुर्सी तथा दरवाजा द्रव्य नहीं है, वे केवल वस्तुएँ हैं, परन्तु उनका निर्माण करने वाली लकड़ी एक द्रव्य है। द्रव्य के अन्य उदाहरण है, लोहा तँबा, वायु, जल आदि। प्रत्येक द्रव्य परमाणुओं से तथा प्रत्येक परमाणु इलेक्ट्रॉ, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से निर्मित होता है।

ऊर्जा (Energy)- ऊर्जा भौतिक कारक है जिसके द्वारा कर्ता में कार्य करने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है। किसी भी कार्य को करने हेतु ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। ऊर्जा द्रव्यात्मक (material) नहीं होती है अर्थात् उसमें भार, आयतन आदि नहीं होता है परन्तु यह अनेक रूपों में पाई जाती है, जैसे ऊष्मा, प्रकाश विद्दुत, ध्वनि आदि।

द्रव्य व ऊर्जा अन्योन्य क्रियाएँ – 20वीं शताब्दी के वैज्ञानिक एल्बर्ट आइन्स्टीन ने केवल गणनाओं द्वारा यह सिद्ध किया द्रव्य एवं ऊर्जा एक दूसरे के समतुल्य है। द्रव्य को ऊर्जा में और ऊर्जा को द्रव्य में परिवर्तित किया जा सकता है। अर्थात द्रव्य वास्तव में घनीभूत ऊर्जा होती है।

द्रव्य एवं ऊर्जा के एक दूसरे को प्रभावित करने की क्रिया उनकी अन्योन्य क्रिया कहलाती है। यदि किसी वस्तु को ऊष्मा ऊर्जा दी जाए तो उसमें प्रसार हो जाता है। इसका ध्ययन करना ही भौतिकी का उद्देश्य होता है।

प्रश्न 21. मापन की आवश्यकता बताइए।

उत्तर – भौतिक राशियाँ – जिसे कोई संख्यात्मक मान दिया जा सकता है, उसे राशि (auantity) एवं जिन राशियों के पदों में भौतिक विज्ञान के नियमों का वर्णन हो, उन्हें भौतिक राशियोँ कहा जाता है। उदाहरणार्थ – किसी देश की जनसंख्या, किसी मनुष्य का मासिक वेतन, किसी विषय में किसी विद्दार्थी के प्राप्तांक आदि राशियाँ है, परन्तु कमरे का ताप (temperature) एक भौतिक राशि है। इसके अतिरिक्त किसी छड़ की लम्बाई, किसी कण का द्रव्यमान, किसी कण पर लगाया गया बल आदि समस्त भौतिक राशियाँ हैं क्योंकि इनकी लम्बाई, द्रव्यमान, बल आदि के द्वारा भौतिकी के नियमों का वर्णन किया जा सकता है।

हमारी ज्ञानेद्रियाँ किन्ही दो वस्तों के समान गुणों की मात्र तुलना कर सकती हैं, परन्तु उनका यथार्थ मापन नहीं कर सकती है, जैसे – दो पिण्डों को भिन्न भिन्न हाथ से उठाकर हम यह बता रसकत हैं कि कौन सा पिण्ड हल्का है और कौन सा भारी। इसी प्रकार दो छड़ों को देखकर अथवा उन्हें बराबर रखकर हम बता सकते हैं कि कौन सी छड़ बड़ी है और कौन सी छोटी। परन्तु कभी कभी हमरारी ज्ञानेद्रियों द्वारा प्राप्त जानकारी गलत भी होती है, जैसे – यदि हम अपने दाएँ हाथ को गर्भ पानी के बर्तन में तथा बाएँ हाथ को ठण्डे पानी के बर्तन में डुबोएँ, उनके पश्चात् दोनों हाथों को एक साथ गुनगुने (Slightly warm) पानी के बर्तन में डुबोएँ तो वही पानी दाएँ हाथ को ठण्डा तथा बाएँ हाथ को गर्म प्रतीत होगा। ऐसा में किस हाथ के अनुभव को उचित माना जाए? इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि भौतिक राशियों का सही सही परिमाणत्मक ज्ञान प्राप्त करने के लिए उनका (यन्त्रों द्वारा) मापन करना बहुत आवश्यक होता है।

प्रश्न 22. बीज किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार के होते हैं? तथा इनकी संरचना को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – आवृतबीजी पौधों में दिनिषेचन (Double Fertillzation) के बाद बीजाण्ड बीज में परिवर्तित हो जाता है। बीज का निर्माण बीजाण्ड के परिवर्तन से होता है। बीजों के अकुरण से नये पौधे का निर्माण होता है।

प्रकार- बीजपत्र के आधार पर बीज दो प्रकार का होता है-

  1. एकबीजपत्री बीज- इस प्रकार के बीज में क बीजपत्र होता है, जैसे धान, मक्का, गेहूँ इत्यादि।
  2. दिबीजपत्री बीज – इस प्रकार के बीज में दो बीज पत्र पाये जाते हैं, जैसे- चना मटर, अरहर आदि।

विभिन्न बीजों की आकृति भिन्न भिन्न प्रकार की होती है। ये गोल, अण्डाकार, वृक्काकार आदि हो सकते हैं। बीजों का रंग भी अलग अलग होता है। बीजों के बाहर एक आवरण पाया जाता है, जिसे बीजावरण कहा जाता है। यह दो परतों में पाया जाता है। बाहरी परत को बाह्रा कवच एवं भीतरी परत को अन्त: कवच कहते हैं। बीज के एक सिरे पर छिद्र पाया जाता है जिसे बीजाण्डद्वार कहते हैं। बीजावरण के अन्दर भ्रूण पाया जाता है। बीजों के अन्दर भ्रूण को पोषण देने हेतु भ्रूणपोण (Endospeerm) पाया जाता है।

Tagged with: , , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*