DElEd Semester 1 Social Studies Samajik Adhyan Short Question Answers in Hindi

DElEd Semester 1 Social Studies Samajik Adhyan Short Question Answers in Hindi

प्रश्न 30. हड़प्पा सभ्यता का प्रमुख बन्दरगाह कौन- सा था? हड़प्पा सभ्यता में विशाल स्नानागा कहाँ मिला ? वर्णन कीजिए।

उत्तर – लोथल हड़प्पा सभ्यता का प्रमुख बन्दरगाह था। मोहनजोदड़ो की खुदाई में जो सबसे विचित्र वस्तु मिली है, वह है- सार्वजनिक स्नानागार। सम्पूर्म स्नानागार की लम्बाई 5 मीटर और चौड़ाई 33 मीटर है। बीच में 25 मीटर लम्बा, 7 मीटर चौड़ा और लगभग 24 मीटर गहरा जलाशय बना हुआ है। उसके चारों ओर ऊँचे ऊँचे चबूतरे व बरामदे हैं। पानी में उतरने के लिए सी2ढ़िया बनी हुई है। फर्श पक्की ईँटों का है तथा दीवारें चूने से इतनी सफाई से जोड़ी गई हैं कि उन पर पानी का प्रभाव नहीं हो सकता था। एक कोने पर लगभग 2 मीटर ऊँची तथा मोटी हैं जिनके द्वारा जलाशय भरा एवं खाली किया जाता रहा होगा। जलाश्य के तीनों ओर बरामदे तथा कमरे हैं। पूरे स्नानागार में छ: प्रवेश द्वारा है।

प्रश्न 31. हड़प्पा सभ्यता में सामाजिक संगठन किस प्रकार से विभक्त था? स्पष्ट किजिए।

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता में सामाजिक संगठन चार वर्गों में बँटा था। प्रथम वर्ग – विदान पुरोहित, ज्योतिषि, वैद्द आदि थे। दितीय वर्ग – योद्धा, सैनिक, राजकीय, पदाधिकारी। तृतीय वर्ग – व्यापारिक, उद्दोगपति। चतुर्थ वर्ग – श्रमिक, नौकर – चाकर आदि थे।

प्रश्न 32. मिस्त्र सभ्यता को नील नदी का वरदान क्यों कहा जाता है?

उत्तर – मिस्त्र की सभ्यता को नील नदी का वरदान इसलिए कहा जाता है क्योंकि नील नदी घाटी की परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की क्षमता से आंशिक रूप से प्रभावित थी। इस उपजाऊ घाटी में उम्मीद के मुताबित बाढ़ तथा नियन्त्रित सिंचाई के कारण आवश्यकता से अधिक फसल होती थी, जिसने सामाजिक विकास एवं संस्कृति को बढ़ावा दिया। संसाधनों की अधिकता के कारण, प्रशासन ने घाटी र आस पास के रेगिस्तानी क्षेत्रों में खनिज दोहन, एक स्वतन्त्र लेखन प्रणाली के प्रारम्भिक विकास, सामूहिक निर्माण और कृषि परियोजनाओं का संगठन, आस पास के क्षेत्रों के साथ साथ व्यापार और विदेशी दुश्मनों को हराने और मिस्त्र के प्रभुत्व को मजबूत करने का इरादा रखने वाली सेना को प्रायोजित किया।

प्रश्न 33. अक्षांश रेखाओं से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – अक्षांश रेखाएँ (Latitudes) – पृथ्वी अपने अक्ष अथवा धुरी पर निरन्तर घूम रही है। अक्ष के दो सिसे हैं। ऊपरी सिरे को उत्तरी ध्रुव तथा निचले सिरे को दक्षिणी ध्रुव कहते हैं। दो ध्रुवों के बीचोबीच पृथ्वी का बीच का रास्ता बताने हेतु ग्लोब पर एक मोटी रेखा खींची जाती है। इसे भूमध्य रेखा अथवा विषुवत् रेखा दो नामों से जाना जाता है। यह रेखा पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है। इसके उत्तरी आधे भाग को उत्तरी गोलार्द्ध और दक्षिणी आधे भाग को दक्षिणी गोलार्द्ध कहते हैं। भूमध्य ग्लोब को दो बराबर हिस्सों में बाँटती हैं।

प्रश्न 34. शीत ऋतु को समझाइए।

उत्तर – हमारे देश में यह ऋतु सामान्यत: मध्य नवम्बर से मध्य मार्च तक रहती है। इस समय सूर्य के दक्षिणी गोलार्द्ध में होने के कारण, उत्तरी गोलार्द्ध में तापमान कम पाये जाते हैं इस ऋतु में देश के उत्तरी एवं उत्र पश्चिमी भागों में तापमान कम पाये जाते हैं जबकि दक्षिण एवं दक्षिण- पश्चिम भागों में तापमान अधिक पाये जाते हैं। उत्तरी भारत का ओसत तापमान 100से 150 सेल्सियस के बीच जबकि दक्षिण भारत में ओसत तापमान 20 से 25 सेल्सियस के मध्य पाये जाते हैं। उच्च पर्वतीय भागों पर तापमान हिमांक बिन्दु से बी नीचे पहुँच जाते हैं। इस ऋतु में सम्पूर्ण उत्तरी भारत में कड़ाके की ठण्ड पड़ती है। रात में पाला तथा सुबह घना कोहरा छाया रहता है। पहाड़ी घाटियों में हिमपात भी होता है। इस ऋतु में उत्तरी तथा दक्षिणी भारत में दैनिक तापान्तर के वितरण में काफी विषमता पाई जाती है।

शीत ऋतु में उत्तरी भारत के तापमान कम होने के कारण उत्तरी मैदानी भागों पर उच्च वायुदाब पाया जाता है, जबकि मकर रेखा के समीप हिन्द महासागर पर न्यून वायुदाब होता है। इसलिए हवाये स्थल से जल की ओर चलती है। इन हवाओं की दिशा उत्तर पूर्व से दक्षिण – पश्चिम की ओर होती है। अत: इन हावाओं को उत्तर पूर्वी मानसून कहते हैं। इन हवाओं की उत्पति स्थलीय भागों से होने के कारण इन हवाओं से वर्षा प्राप्त होती है, परन्तु जब ये हवाएँ बंगाल की खाड़ी को पार करके तमिलनाडु के तटीय भागों पर पहुँचती है, तो यहाँ 25 सेमी तक वर्षा कर देती हैं। पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा कम हो जाती है। समान्यत: शीत ऋतु अत्यन्त सुहावनी होती है। स्वच्छ आकाश, न्यून तापमान एवं आर्द्रता तथा उत्तर से प्रवाहित होने वाली शीतल मन्द समीर इस ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

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