DElEd Semester 1 Social Studies Samajik Adhyan Short Question Answers in Hindi

DElEd Semester 1 Social Studies Samajik Adhyan Short Question Answers in Hindi

प्रश्न 35. वस्तु विनियम प्रणाली को उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर – वस्तु विनियम प्रणाली से आशय- जब एक वस्तु अथवा सेवा के बदले कोई दूसरी वस्तु या सेवा दी जाती है तो उसे वस्तु विनियम कहा जाता है। अत: इसे हम स प्रकार भी व्यक्त कर सकते हैं कि जब दो पक्ष आपास में स्वेच्छा तथा पारस्परिक सहयोग के धार पर अपनी वस्तुओं का आदान प्रदान करते हैं तो इस अवस्था को वस्तु विनियम कहा जाता है।

जेवन्स के अनुसार तुलनात्मक रूप से कम आवश्यक वस्तु देकर तुलनात्मक रूप से अधिक आवश्यक वस्तु लेना वस्तु विनियम कहलाता है।

प्रश्न 36. देशान्तर रेखाएँ क्या हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—देशान्तर रेखाएँ (Longitudes)-भू-पटल पर पूर्व एवं पश्चिम की ओर किसी स्थान विशेष के देशान्तर का मानक साम्योत्तर से नापी गई दूरी का कोण देशान्तर कहलाता है। दोनों ध्रुवों को मिलती हुई खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाओं को देशान्तर रेखाएँ कहते हैं। ध्रुव एक विन्दु है और किसी विन्दु के चारों ओर अधिकतम 360° का कोण बन सकता है। देशान्तर रेखाएँ भूमध्य रेखा पर समकोण (90°) बनाती हैं। अक्षांश के समान ही देशान्तर रेखाओं का मापन डिग्री (0°) मिनट (C) तथा सेकण्ड (“) में किया जाता है।

यह ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ होती हैं। ये रेखाएँ समानान्तर नहीं होते हैं। ये रेखाएँ उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव पर एक विन्दु पर मिल जाती हैं। ध्रुवों से विषुवत् रेखा की ओर बढ़ने पर देशान्तरों के मध्य की दूरी बढ़ती जाती है। तथा विषुवत् रेखा पर इसके बीच की दूरी अधिकतम (111-32 किमी) होती है। ग्रीनविच वेधशाला से गुजरने वाली रेखा को 0° देशान्तर माना जाता है। इसकी बायीं ओर की रेखाएँ पश्चिमी देशान्तर और दाहिनी ओर की रेखाएँ पूर्वी देशान्तर कहलाती हैं।

प्रश्न 37. अर्थशास्त्र क्या है? इसके जनक कौन थे ?

उत्तर–सामाजिक दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से सम्बन्धित है क्योंकि मानव एक सामाजिक प्राणी है। अर्थशास्त्र इन्हीं सामाजिक रूप से सम्बन्धित मनुष्य की आर्थिक क्रयाओं का अध्ययन करता है। प्रत्येक प्राणी की कुछ-न-कुछ जरूरतें होती हैं चाहे वह नुष्य हो, कौड़ा-मकोड़ा हो या पशु-पक्षी। सभी अपनी भूख को शान्त करने हेतु प्रयास है। सभी को आहार की आवश्यकता होती है। परन्तु इन सबमें मानव ने अधिक मानसिक प्रगति की है। मनुष्य अपनी भौतिक, शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक आवश्यकाताओं की पूर्ति विचारणा और चिन्तन द्वारा करता है।

अब प्रश्न उठता है कि आर्थिक समस्या क्या है? मनुष्य के जीवन में समय समय पर विभिन्न प्रकार की समस्याएँ आती है। उनमें कुछ आर्थिक होती हैं और कुछ अनार्थिक। आर्थिक समस्याओं की दो विशेषताएँ है।

  1. सर्वप्रथम विशेषता यह कि हम सब मनुष्यों की कुछ न कुछ आवश्यकताएं होती है। (All of dus feel wants)>
  2. दूसरी विशेषता यह कि कि जन साधनों से हम अपनी जरूरते पूर्ण करते हैं, वे सीमित होती है। (The resources in men, material or time are limited or scarce)।
    साधनों के सीमित होने के कारण मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु भिन्न – भिन्न कार्य करता है। इन विभिन्न कार्यों के सम्बन्ध में जो विभिन्न प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न होती है, उन्हें, आर्थिक समस्याएँ कहते हैं। इससे स्पष्ट हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दो प्रकार के कार्य करता है-
  3. एक वे जो धन कमाने से सम्बन्ध रखते हैं, एवं (ब) दूसरे वे जो अर्जित धन को जरूरतों की पूर्ति पर व्यय करने से सम्बन्ध रखते हैं।

अर्थशास्त्र इन दोनों प्रकार की क्रियाओं का अध्ययन करता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अर्थशास्त्र उन कार्यों का अध्ययन करता है, जिनके द्वारा आवश्यकताओं की पूर्ति करना सम्भव होता है। अर्थशास्त्र के जनक एडम स्थिथ थे।

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