DElEd Semester 1 Social Studies Samajik Adhyan Short Question Answers in Hindi

DElEd Semester 1 Social Studies Samajik Adhyan Short Question Answers in Hindi

प्रश्न 18. प्रमुख उपनिषदों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – कुछ उपनिषद् ऋग्वेदीय, कुछ सामवेदीय, कुछ कृष्ण यजुर्वेदीय एवं कछ अथर्ववेदीय हैं।

  1. ईशावास्योपनिषद् – इस उपनिषद् में अठारह मन्त्र हैं। इसमें दर्शन के अन्तिम लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ साथ कर्म की भी जरूरत है। अधिकांश भारतीय दर्शन में इस विचारधारा की प्रधानता है।
  2. केनोपनिषद् – इस उपनिषद् में ब्रह्रा की महिमा की व्यख्या है। ब्रह्रा सर्वव्यापी स्वयं प्रकाशमान तत्व हैं।
  3. कठोपनिषद् – इसमें यमराज एवं नचिकेता के मध्य में संवाद है। ये संवाद बहुत महत्वपूर्ण एवं रोचक हैं। इनमें आत्मज्ञान का विवेचन एवं महिमा तथा मायवी विषयों की निकृष्टता का वर्णन है।
  4. प्रश्नोपनिषद् – यह गुरू शिष्य संवाद की श्रृखला है। सत्यकाम, सुकेशी, वैदभी, कबन्धी एवं कौत्सल्य आदि समिधा सहित पिप्पलवद ऋषि के निकट ब्रह्रा ज्ञान की प्राप्ति हेतु जाते हैं।
  5. मुण्डकोषनिषद् – इस उपनिषद् को मुण्डक भी कहते हैं। इसके मन्त्रों में सप्रपेच ब्रह्रा का रोचक ढंग से वर्णन है।

प्रश्न 19. जैन धर्म के पंच महाव्रतों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – जैन धर्म के पंच महाव्रत

  1. अहिंसा – जैन धर्म के अनुसार किसी भी जीव को तीन योग वं तीन कारण से हिंसा न करना हिंसा न करना अहिंसा है। तीन योग अर्थात् मन, वचन र काम तथा तीन करण अर्था करना, करवाना और अनुमोदन, करना। अहिंसा के पालन से मनुष्य में निर्भयता, वीरता वत्सलता, क्षमा, दया आदि आत्मिक शक्तियाँ उत्पन्न होती हैं और पाशविक शक्तियाँ नष्ट होती हैं।
  2. सत्य – मन, वचन वं शरीर से मिथ्या आचरण का परित्याद करना सत्य है असत्य का त्याग करना और यथाश्रुत वस्तु के स्वरूप का कथन सत्य कहलाता है। सत्य वह होता है जो अर्थ से भूतार्थ सदभूत अर्थ वाला हो, यथार्थ हो एवं मुधर हो।
  3. अस्तेय – अस्तेय से अभिप्राय है चोरी न करना अर्तात् दूसरे की वस्तु को बिना उसकी अनुमति के ग्रहण करना स्तेय हैं और इसका सर्वथा परित्याद करना अस्तेय है। जैन धर्म के अनुसार धन – सम्पत्ति का अपहरण, मनुष्य के बाह्रा जीवन का अपहरण है। मन, वचन और काम से चोरी न करना, चोरी न करवाना और चोरी करने वालो का अनुमोदन न करना ही अस्तेय महाव्रत है।
  4. ब्रह्राचर्य – केवल कामवासना से दूर रहना ही ब्रह्राचर्य नहीं है, अपितु इन्द्रियों पर पूर्ण नियन्त्रण ही ब्रह्राचर्य है। जैन धर्म के अनुसार तपस्याओं में सबसे उत्तम तप ब्रह्राचर्य हैं स्मरण शक्ति एवं बद्धिक प्रतिभा दोनों शक्तियों ब्रह्राचर्य से प्राप्त होती हैं। ब्रह्राचर्य से हीन मन वचन र क्रम की पवित्रता रहती है।
  5. अपरिग्रह – संसार के समस्त विषयों के प्रति राग एवं ममता का परित्याग कर देना अपरिग्रह है। आवश्यकता से अधिक किसी वस्तु का संग्रह न करना ही अपरिग्रह है।

प्रश्न 20. सौरमण्डल से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – सौरमण्डल – सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले विभिन्न ग्रहों, क्षुद्रग्रहों धूमकेतुओं, उल्काओं एवं अन्य आकाशीय पिण्डों के समूह को सौरमण्डल कहते हैं।

अन्तरिक्ष में कई आकाशगंगाएँ हैं जिनमें मिल्की वे नामक हमारी आकाशगंगा में कई सौरमण्डल हैं। सूर्य एवं इसके चारों ओर गुरूत्वाकर्षण बल के कारण घूमने वाले ग्रहों उपग्रहों, उल्काओं व धूमकेतुओं को संयुक्त रूप से सौरमण्डल कहा जाता है।

हमारे सौरमण्डल का केन्द्र सूर्य हबै तथा इसमें आठ ग्रह हैं। 24 अगस्त, 2006 को अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) ने ग्रहों की नई परिभाषा दी जिसके तहत केवल वही चमकदार खगोलीय पिण्ड ग्रह माने जायेंगे, जो अपनी कक्षा में सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और जिनका द्रव्यमान इतना हैं कि ये बाहरी ग्रहों के प्रभाव से बचने हेतु अपने गुरूत्वाकर्षण के कारण लगेभग गोल आकार के हैं, साथ ही अपने पड़ोसी पिण्डों की कक्षा नहीं लाँघते हैं। यम (Pluto) की कक्षा सौरमण्डल के दूसरे ग्रहों की तुलना में झुकी हुई है और वरूण की कक्षा को काटती है। इसी आधार पर यम (Pluto) को ग्रहों की जमात से बाहर कर दिया गया है। अब सौरमण्डल में केवल आठ ग्रह रह गये हैं। ग्रहों का नया क्रम अब यह माना जायेगा – बुध (Mercury), शुक्र (Venus), पृथ्वी (Earth), मंगल (Mars) बृहस्पति (Jupiter), शनि (Saturn), अरूण (Uranus), वरूण (Naptune)।

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