UPTET Paper Level 1 Samanya Hindi Muhavray And Lokoktiyan Question Answer Paper


लोकोक्तियाँ भाग (इ)

निर्देश-नीचे कुछ लोकोक्तियाँ दी गई हैं. प्रत्येक के चार वैकल्पिक अर्थ दिए गए हैं. उपर्युक्त अर्थ का चयन कीजिए.

  • अँधे के हाथ बटेर लगना-
  • अपात्र को सफलता या सम्मान मिल जाना
  • अँधेरे में कोई चीज मिल जाना
  • जुए में जीत हो जाना
  • रास्ते में कोई चीज पङी हुई मिल जाना
  • अध जल गगरी छलकत जाए-
  • सम्भल कर न चलना
  • कायदे से काम न करना
  • अल्पज्ञ अथवा कम धनाढ्य द्वारा गर्व प्रदर्शन
  • अपने काम का प्रदर्शन करना
  • आ बैल मुझे मार-
  • छेङछाङ करना
  • जानबूझकर मुसीबत में पङऩा
  • व्यर्थ ही किसी को गाली देना
  • बैल के सामने बैठ जाना
  • आग लगने पर कुआँ खोदना-
  • तुरन्त काम में लग जाना
  • विपत्ति आ जाने पर उसके निराकरण का उपाय करना
  • आवश्यकता के अनुसार काम करना
  • व्यर्थ भाग-दौङ करना
  • आये थे हरि भजन को ओजन लगे कपास-
  • साधुओं की संगति छोङ देना
  • भक्ति छोङकर व्यापार करने लगना
  • गृहस्थी के झंझटों में फँस जाना
  • वांछित कार्य छोङकर अन्य कार्य में लग जाना
  • खोदा पहाङ निकली चुहिया-
  • गलत काम करना
  • मुसीबत मोल लेना
  • अपने प्रयत्न में असफल होना
  • परिश्रम को देखते हुए बहुत कम फल मिलना
  • घर में नहीं दाने, बीबी चली भुनाने-
  • सामर्थ्य से बाहर काम करना
  • व्यर्थ के कामों में समय नष्ट करना
  • शेखी मारना
  • सामार्थ्य से बाहर काम करना
  • तू डाल-डाल मैं पात-पात-
  • एक से एक बढकर चालाक होना
  • पेङों पर चढकर खेलना
  • अपनी कला का प्रदर्शन करना
  • चोरी करने के बाद पकङाई में न आना
  • अपनी करनी पार उतरनी-
  • जैसा करोगे वैसा भरोगे
  • अपने दुःखों के लिए दूसरों को दोष क्यों

  • अपने ही कर्मों से व्यक्ति को सफलता मिल सकती है
  • सब भाग्य का खेल है
  • अपने मरे बिना स्वर्ग नहीं दिखता-
  • स्वर्ग देखने के लिए मरना जरूरी है
  • स्वयं ही सब काम करना चाहिए
  • किताबें पढकर स्वर्ग पर विश्वास कैसे किया जाए
  • स्वयं अपने आप प्रयत्न करने पर ही काम बनता है
  • घर की खाँङ किरकिरीर लागे, बाहर का गुङ मीठा-
  • बाजार में हमेशा ताजी वस्तु मिलती है
  • दूसरे की पत्तल का भात मीठा लगता है
  • चटोरे लोग घर के भोजन को बुरा बताते हैं
  • सरलता से उपलब्ध होने वाली श्रेष्ठ वस्तु भी अच्छी नहीं लगती है
  • टट्टी की ओट में शिकार खेलना-
  • छिपकर किसी के विरुद्ध काम करना
  • धोखाधङी करना
  • चोरी-छिपे काम करना
  • घात लगाना
  • हाथ कंगन को आरसी क्या?
  • हर चीज को देखने के लिए दर्पण की जरूरत नहीं होती है
  • जो बात स्पष्ट है, उसके लिए प्रमाण क्या माँगना
  • कंगन पहनने वाली नारियाँ आरसी नहीं पहनती हैं
  • कंगन का मूल्यांकन बिना दर्पण के किया जा सकता है
  • होनहार बिरवान के होत चीकने पात-
  • जो व्यक्ति भविष्य में महान बनने वाले होते हैं, उनके गुण बचपन में ही प्रकट हो जाते हैं
  • कल्ले देखकर पता लग जाता है कि यह कैसा पौधा है
  • अच्छे पौधे की पहचान यह है कि उसके पत्ते चिकने होते हैं
  • चिकने पत्तों को सब देखना चाहते हैं
  • नाच न आवे, आँगन टेढा-
  • मूर्ख लोग बहाने बनाते हैं
  • टेढे आँगन में नाच ठीक तरह नहीं होता है
  • शेखी मारना
  • कार्य करने की क्षमता न होने पर दूसरों को दोष देना
  • ऊधों का लेना, ना माधों का देना-
  • सबसे अलग रहना, अपने काम से काम
  • देश छोङकर चले जाना
  • हिसाब साफ करना, उधार खाता न करना
  • भक्तिभाव से दूर रहना
  • घर की मुर्गी दाल बराबर-
  • घर में आसानी से प्राप्त होने वाली वस्तु का कोई महत्व नहीं होता है
  • घर में मुर्गी हो तो उसको दाल की तरह रोज खाना
  • घर में बनाया हुआ मर्गी का शोरबा दाल की तरह अच्छा लगता है
  • घर में पकाई हुई मुर्गी में स्वाद नहीं आता है
  • पाव भर चून पुल पर रसोई-
  • अपनी सम्पत्ति का प्रदर्शन करना
  • सीमित साधन होने पर भी अधिक लोगों को निमन्त्रित कर देना
  • थोङी चीज को बहुत समझ लेना
  • अपनी चीज को बर्बाद करना
  • पढे फारसी बेचें तेल, यह देखो कुदरत का खेल-

  • बेकार रहना
  • योग्यता की तुलना में विवशता के कारण निम्न स्तर का कार्य करना
  • विधा का अपमान करना
  • फारस में पढे-लिखे लोग तेल बेचने का व्यापार करते हैं
  • धोबी का कुत्ता घर का न घाट का-
  • दल-बदलू की हालत धोबी के कुत्ते की तरह हो जाती है
  • धोबी के घर कुत्ते की कद्र नहीं होती है
  • किसी का भी विश्वासपात्र न होना
  • कुत्ता धोबी के किसी काम में नहीं आता है
  • कोयले की दलाली में हाथ काले-
  • सोहबत का असर पङता ही है
  • बुरे काम का बुरा नतीजा होता है
  • बुरे काम में सहायता करने पर बुराई हाथ लगती है
  • कोयले के पास न जाने पर भी कालौंच लग ही जाती है

भाग (ई)

निर्देश-नीचे कुछ वाक्य दिए गए हैं.प्रत्येक को व्यक्त करने के लिए चार वैकल्पिक लोकोक्तियाँ दी गई हैं. उपयुक्त लोकोक्ति का चयन कीजिए.

  • अभीप्सित वस्तु का मिल जाना-
  • अन्धा क्या चाहे दो आँखें
  • अँधे के हाथ बटेर लग जाना
  • खुदा मिला और नंगे सिर
  • छप्पर फट पङना
  • अकेला मनुष्य कोई बङा काम नहीं कर सकता-
  • दीवाल से सिर मारना
  • अकेला चना भाङ नहीं फोङ सकता
  • अपनी खिचङी अलग पकाना
  • कहीं की ईँट कहीं का रोङा
  • अपने-अपने मन की करना-
  • अपनी करनी पार उतरनी
  • अपनी-अपनी ढफली अपना-अपना राग
  • अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना
  • अपना हाथ जगन्नाथ
  • दोहरा लाभ होना-
  • गोरस बेचत हरि मिलें, एक पंथ दो काज
  • अंधे पीसें कुत्ते खाएँ
  • आम के आम गुठलियों के दाम
  • गंगा गए गंगादास , जमुना गए जमुनादास
  • बेजोङ अथवा अधूरा मेल-
  • आधा बगुला आधा सुआ
  • अरहर की टट्टी गुजराती ताला
  • कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली
  • आधा तीतर आधा बटेर
  • दूसरों से अधिक सम्बन्ध न रखना-
  • अपनी ढाई चावल की खिचङी पकाना
  • अपने रामजी की अयोध्या न्यारी
  • ऊधों का लेना न माधों का देना
  • तीन में ना तेरह में, मृदंग बजावै डेरे में
  • दो व्यक्तियों में बहुत अधिक अन्तर होना-
  • कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली
  • कहाँ चावल, कहाँ गेहूँ
  • बैल और भैंसा की गाङी नहीं चलती
  • आधा तीतर आधा बटेर
  • अपनी हानि करके भी दूसरों की हानि करना-
  • न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी
  • नौ नकद न तेरह उधार
  • अपनी नाक कटा कर दूसरे का अपशकुन करना
  • सींग काट कर बछङों में मिलना
  • एकता में शक्ति निहित है-
  • बूँद-बूँद से घट भरता है
  • एक और एक ग्यारह होते हैं
  • एक हाथ से ताली नहीं बजती
  • एक चना भाङ नहीं फोङ सकता
  • बहुत अधिक धीमी गति से काम करना-
  • खोदा पहाङ निकली चुहिया
  • पाव भर चून पुल पर रसोई
  • घर के बुद्धू घर को आए
  • नौ दिन चले अढाई कोस
  • अपने घर में तो दुष्ट व्यक्ति भी सीधा व्यवहार करता है-
  • घर का भेदी लंका ढावै
  • ऊँट की चोरी निहुँरे-निहुँरे
  • बाहर टेढों चलत है घर में सीधा साँप
  • चोर के पैर नहीं होते
  • शरणागत की रक्षा-
  • उगँली पकङ पर पहुँचा पकङऩा
  • बाँह गहे की लाज
  • ऊधों की पगङी माधों के सिर
  • आस्तीन का साँप बनना
  • गुणवान ही गुणों की पहचान करता है-
  • बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद
  • सोना जाने कसै
  • जो जागे सौ पावे
  • हीरा की परख जौहरी जाने
  • बङे लोग देखने की अपेक्षा सुनने पर अधिक विश्वास कर लेते हैं-
  • चिराग तले अँधेरा


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