UPTET Paper Level 1 Samanya Hindi Pratyay Question Answer Paper

UPTET Paper Level 1 Samanya Hindi Pratyay Question Answer Paper Uttar PradeshTeacher Eligibility Test (UPTET) Most Important Question Answer Papers in Hindi English PDF Download.

UPTET Paper Level 1 Samanya Hindi Pratyay Question Answer Paper

UPTET Paper Level 1 Samanya Hindi Pratyay Question Answer Paper

UPTET Paper Level 1 Class 1 to 5 Question Answer Sample Model Practice Set.

प्रत्यय (Pratyay)

हिन्दी प्रत्यय

सामान्य परिचय- किसी शब्द के अन्त में जोङे जाने वाले शब्द या शब्दांश को प्रत्यय (Suffix) कहते हैं.

प्रत्यय के भेद-संस्कृत में प्रत्यय  दो प्रकार के माने गए हैं-(I) कृत प्रत्यय,(II)तद्धित प्रत्यय.

कृत प्रत्यय- जो प्रत्यय धातु में जुङकर संज्ञा अथवा विशेषण शब्दों की रचना करते हैं , उन्हें  कृत प्रत्यय कहा जाता है.कृत प्रत्यय से बने शब्द कृदंत कहलाते हैं.यथा-

धातु         प्रत्यय        निर्मित शब्द

पठ          आई =       पढाई

चल         अक =       चालक

तद्धित प्रत्यय- धातु को छोङकर अन्य शब्दों (संज्ञा, विशेषण) आदि में जो प्रत्यय जोङे जाते हैं उन्हें तद्धित प्रत्यय जोङे जाते हैं. इनसे बने शब्द तद्धितांत कहलाते हैं.

शब्द              प्रत्यय              तद्धितांत शब्द

लोहा              हार    =           लोहार

कृपा               आलू   =           कृपालु

सुख               इया   =           सुखिया

मशाल             ची    =           मशालची

हिन्दी में प्रयुक्त प्रत्ययों को स्थूल रूप से निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-

  • तत्सम प्रत्यय
  • तदभव प्रत्यय
  • देशज प्रत्यय, तथा
  • विदेशी प्रत्यय
  • तत्सम प्रत्यय-इन प्रत्ययों का प्रयोग अधिकांश उन्हीं शब्दों में होता है, जो संस्कृत से सीधे हिन्दी में आए हैं अथवा जो संस्कृत की तरह ही हिन्दी में प्रयुक्त होने के कारण तत्सम कहलातें हैं. हिन्दी में प्रयुक्त तत्सम ये हैं-
  1. -कौशल (कुशल), पौरुष (पुरुष), मौन (मुनि), गौरव (गुरु).
  2. – प्रत्यय आकारान्त धातुओं में जोङा जाता है और इसके प्रयोग से संज्ञाएँ बनती हैं. जैसै-

पूजा(पूज्),कथा(कथ्)

इच्छा (इच्छ्), शिक्षा (शिक्ष्)

यहाँ कोष्ठक में मूल धातु दी गई है जिसमें आ प्रत्यय जोङकर संज्ञाएं निर्मित की गई हैं.

  1. लु- यह प्रत्यय संज्ञा से विशेषण बनाने के काम आता है. जैसे-दयालु, कृपालु, निद्रालु, लज्जालु आदि.
  2. जीवी-इस प्रत्यय का प्रयोग जीने वाले के अर्थ में होता है. जैसे-अल्पजीवी, दीर्घजीवी, परजीवी, श्रमजीवी, बुद्धिजीवी आदि.
  3. तया– यह प्रत्यय हिन्दी में ‘रूप से’ के अर्थ में प्रयुक्त होता है. वस्तुतः इस प्रत्यय का विकास संस्कृत के आकारांत स्त्रीलिंग शब्दों के तृतीया एकवचन के अन्तिम भाग से हुआ है, जैसे- साधारणतया, मुख्यतया, विशेषतया, सामान्यतया आदि.
  4. ता-इस प्रत्यय का प्रयोग संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और सर्वनाम शब्दों से संज्ञा बनाने के लिए होता है, जैसे- (संज्ञा से ) कविता, जनता,सहायता, शिशुता, आदि,(विशेषण से ) कुरूपता, कोमलता, नवीनता, समता, स्वतन्त्रता, आदि( सर्वनाम से) ममता, अहंता,निजता आदि. भाववावचक संज्ञाएं भी इससे बनती हैं.

त्व- इस प्रत्यय का प्रयोग मुख्यतता भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए ही होता है, जैसे-कवित्व, लघुत्व, महत्व, गुरुत्व, अमरत्व, सतीत्व आदि.

  1. वान्- यह प्रत्यय भी वाला के अर्थ में अपनाया जाता है, जैसे-गुणवान्, रूपवान्, धनवान्, बलवान् आदि.
  2. शाली- इस प्रत्यय का प्रयोग भी वाला के अर्थ में होता है, जैसे-भाग्यशाली, बलशाली, शक्तिशाली,सौभाग्यशाली आदि.
  3. इत-फलित(फल),हर्षित(हर्ष), पल्लवित(पल्लव) मुकुलित(मुकुल).
  4. ईन-कुलीन(कुल),युगीन(युग), ग्रामीण(ग्राम).
  5. ईय– भारतीय(भारत), भवदीय(भवत्), नारकीय(नरक), स्वकीय(स्व)
  6. इल- पंकिल(पंक), फेनिल(फेन), धूपिल(धूप).
  7. इम-अग्रिम(अग्र), अंतिम(अंत), पश्चिम(पश्च).
  8. इमा-मधुरिमा(मधुर), गरिमा(गुरु), महिमा(महत्).
  9. एय- कौन्तेय(कुन्ती), राधेय(राधा), गांगेय(गंगा).
  10. कार-साहित्यकार(साहित्य), स्वर्णकार(स्वर्ण), पत्रकार(पत्र).
  11. वती-भाग्यवती(भाग्य), रूपवती(रूप), प्रभावती(प्रभा).
  12. द- जलद(जल), नीरद(नीर), दुःखद(दुःख).
  13. जा– अर्कजा(अर्क), रविजा(रवि), तनुजा(तनु).
  14. स्थ- कंठस्थ(कंठ), तटस्थ(तट), दूरस्थ(दूर).
  15. ज्ञ-मनोज्ञ(मनः),सर्वज्ञ(सर्व), अल्पज्ञ(अल्प).
  16. धर- विधाधर(विधा), चक्रधर(चक्र), मुरलीधर(मुरली).
  • तदभव प्रत्यय-तदभव प्रत्यय संस्कृत से विकसित हुए है और डॉं भोलानाथ तिवारी इन्हें हिन्दी का अपना प्रत्यय बताते हैं. इन प्रत्ययों को तदभव शब्दों के साथ जोङा जाता है. यथा-
  1. अक- भनक, ठनक, तङक, भङक, खनक.
  2. अन– मिलन, घुटन, चलन, कहन, सहन.
  3. आई- पढाई, सिलाई, मिठाई, बुराई, लङाई.
  4. आका-धमाका,सनाका, पटाका, लङाका.
  5. आस-मिठास, खटास, प्यास, निदांस.
  6. अल-मांसल, शीतल, घायल, श्यामल.
  7. आंध- सडाँध, चिराँध.
  8. आर-सुनार, लुहार, गंवार.
  9. आल-ससुराल, ननिहाल, ददिआल, घङियाल.
  10. आना-राजपूताना, घराना, तेलंगाना, पैताना.
  11. आवट– मिलावट, लिखावट, तरावट, बनावट, रूकावट.
  12. आहट-घबराहट, चिकनाहट, बुलाहट, कङवाहट.
  13. इन-लुहारिन, कहारिन, पुजारिन, तेलिन.
  14. इयल-मरियल, सङियल, अङियल.
  15. इया-लुटिया, डिबिया, चकिया, मुखिया, रसिया, मुम्बइया.
  16. -टोकरी, चीनी, जापानी, पहाङी, गढवाली, हथौङी.
  17. ईला-पथरीला, चमकीला, रेतीला,रौबीला.
  18. उआ-गेरुआ, बबुआ, फगुआ.
  19. -पेटू, चालू, ढालू, नक्कू, दब्बू.
  20. एरा- ममेरा, चचेरा, फुफेरा, सपेरा, बहुतेरा.
  21. ऐत– डकैत, लठैत, अल्हैत.
  22. ऐला- विषैला, कसैला, मटैला, बनैला.
  23. ओला-मझोला, संपोला, खटोला.
  24. औना– बिछौना, खिलौना.
  25. टा-कलूटा, चोट्टा, रोंगटा.
  26. ता-जागता, सोता, खाता, पीता.
  27. ती-गिनती, जागती, सोती, चढती, चलती.
  28. त- बचत, खपत, रंगत, चाहत.
  29. नी-ओढनी, चटनी, मिलनी, करनी.
  30. ङा-बछङा, मुखङा, दुखङा, चपङा.
  31. पा-बुढापा, मोटापा, रंङापा.
  32. पन-बचपन, लङकपन, बालपन, पागलपन.
  33. ल,ला-मंजुल, घुंघला, मंजुला, निचला.
  34. वान-गाङीवान, कोचवान.
  35. वां-छठवाँ, सातवाँ, आठवाँ, पांचवाँ.
  36. वाल-कोतवाल.
  37. वाला-रखवाला, घरवाला, ताँगेवाला.
  38. सरा-दूसरा, तीसरा.
  39. हरा-दुहरा, तिहरा, चौहरा, सुनहरा.
  40. हार- खेवनहार, पालनहार, भूमिहार, होनहार,
  • देशज प्रत्यय– वे प्रत्यय जिनकी व्युत्पत्ति का पता नहीं इस वर्ग में आते हैं. यथा-
  1. अक्कङ-भुलक्कङ, पियक्कङ, सुवक्कङ, घुमक्कङ.
  2. अङ- अन्धङ, भुक्खङ.
  3. आक-तैराक , खटाक, तङाक.
  4. आटा-सन्नाटा, खर्राटा, फर्राटा.
  • विदेशी प्रत्यय-हिन्दी में विदेशी प्रत्यय तीनों स्त्रोतों से आए हैं-अरबी, फारसी, और अंग्रेजी.

प्रत्येक के प्रत्यय एवं उनसे बने कतिपय शब्दों के उदाहरण यहाँ दिए जा रहे हैं-

अरबी के प्रत्यय और उनसे निर्मित हिन्दी में प्रयुक्त शब्द

अन्-मसलन, जबरन

आनी-रुहानी, बर्फानी

इयत्-आदमियत्, इन्सानियत

-नादानी, नाराजी,खूबसूरती, पहलवानी.

फारसी के प्रत्यय और उनसे निर्मित हिन्दी में प्रयुक्त शब्द

  • खरीदा, पहुँचा
  • जानना, छूटना

आना-रोजाना, सालाना

इश-कोशिश, मालिश, फरमाइश

-आमदनी, खुशी, बंदी, सिपाही

कार-काश्तकार, सलाहकार

गर-सौदागर, कारीगर

गार-मददगार, यादगार

चा-चमचा, गलीचा, बगीचा

दान-खानदान, इत्रदान, पीकदान

बान-मिहरबान


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