UPTET Paper Level 1 Samanya Hindi Uccharangat Ashudhiya Question Answer Paper


अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
नैन नयन
चाहिये चाहिए
दाइत्व दायित्व
रचयता रचयिता
नाइका नायिका
सेनिक सैनिक
भाषाऐं भाषाएँ
अयसा ऐसा
जै हिन्द जय हिन्द
परलै प्रलय
कवियत्री कवयित्री
सैना सेना
वय्याकरण वैयाकरण
वैश्या वेश्या

ई और यी सम्बन्धी भूलें-

अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
उत्तरदाई उत्तरदायी
स्थाई स्थायी
धराशाई धराशायी
लङायी लङाई
नई नयी
विजई विजयी

ओ, और, अव, आव सम्बन्धी भूलें-

अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
अक्षोहिणी अक्षौहिणी
चुनाउ चुनाव
व्योहार व्यवहार
होले हौले
व्योपार व्यापार
गोतम गौतम
झुकाउ झुकाव
ओधौगिक औधोगिक
क्यूँ क्यों

अनुस्वार और अनुनासिक सम्बन्धी भूलें-

अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
अंधेरा अँधेरा
गंवार गँवार
आँदोलन आंदोलन
गाँधी गांधी
सँस्कृत संस्कृत

द्रष्टव्य-कभी-कभी ये चिन्ह् अकारण और व्यर्थ लगा दिए जाते हैं, जैसे-दुनियाँ, जाँति-पाँति, सोंचो ,पूँछकर, मामां आदि. इनके शुद्ध रूप हैं-दुनिया, जाति-पाँति, सोचो, पूछकर, मामा आदि.

पंचम वर्ण का प्रयोग-ङ्, ज्,ण्, न्, म् को पंचमाक्षर कहते हैं. ये अपने वर्ग के व्यंजन के साथ प्रयुक्त होते हैं, यथा-

अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
कन्घा कंघा
झन्डा झंडा
सन्मुख सम्मुख
दन्ड दण्ड
सम्वाद संवाद
सन्सार संसार
चन्चु चञ्चु
सम्वत् संवत्
सेन्टर सेंटर, सेण्टर
कन्ठ कंठ, कण्ठ
सन्शय संशय

द्रष्टव्य- हम स्वयं देख सकते हैं पंचमाक्षर के स्थान पर न का प्रयोग अशुद्ध है. इसके स्थान पर अनुस्वार का प्रयोग शुद्ध है.

विसर्ग सम्बन्धी अशुद्धियाँ-

अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
अंताकरण अंतःकरण
दुख दुःख
विशेषतयः विशेषतया, विशेषतः
दुसह दुःसह

सन्धि करने में भूलें स्वर सन्धि

अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
अत्याधिक अत्यधिक
अनाधिकार अनधिकार
जात्याभिमान जात्याभिमान
देवुत्थान देवोत्थान
बालुपदेश बालोपदेश
सदोपदेश सदुपदेश
अत्योक्ति अत्युकित
उपरोक्त उपर्युक्त
तदोपरान्त तदुपरान्त
परयन्त पर्यन्त
रीत्यानसार रीत्यनुसार

व्यंजन सन्धि

अशुद्ध रूप शुद्ध रूप
आछादन आच्छादन
उत्पाति उत्पाद
जगतगुरु जगद्गुरु
जगननाथ जगन्नाथ
महत्व महत्व
शरत्यचन्द्र शरच्चन्द्र
संसद् सदस्य संसत्सदस्य
सत्गुण सद्गुण
सन्मान सम्मान
सम्हार संहार
उछवास उच्छ्वास
उज्वल उज्जवल
जगतबंधु जगद्बंधु
भगवतभक्ति भगवद् भक्ति
यावतजीवन यावज्जीवन
छत्रछाया छत्रच्छाया
सतगुरु सद्गुरु
सदोपदेश सदुपदेश
सन्मुख सम्मुख

विसर्ग सन्धि


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