CTET UPTET Problems Environment Teaching Study Material in Hindi

CTET UPTET Problems Environment Teaching Study Material in Hindi

CTET UPTET Problems Environment Teaching Study Material in Hindi : पर्यावरण में समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। पर्यावरण की समस्याओं का निवारण करने के लिए समाज ने कुछ ऐसे कदम बढ़ाए। जो सभी नागरिकों के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। समाज के नागरिकों को जागरुक करने के लिए अब सभी Exam में पर्यावरण से सम्बन्धित समस्याओं के Questions की पूछा जाता हैं। इन Questions को Candidate अपने जीवन में उत्पन्न समस्याओं के द्वारा हल कर लेता हैं। परन्तु कुछ Question ऐसे होते हैं जो Study Material के द्वारा ही हल होते हैं। इसलिए Candidate को Study Material की भी आवश्यकता होती है। अत: पर्यावरण की समस्या को हल करने के लिए यह एक उचित उपाय हैं।

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CTET UPTET TIER 2 Problems of Environment Teaching (पर्यावरण शिक्षण की समस्याएँ) Study Material in Hindi

पर्यावरण विज्ञान एक अपेक्षाकृत नया विषय है। इसके प्रति लोगों की रुचि एवं उत्सुकता दोनों ही दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विषय की व्यापकता ही इसके शिक्षण की प्रमुख समस्या है। पर्यावरण विषय का सम्बन्ध किसी विषय विशेष से न होकर सम्पूर्ण सृष्टि से सम्बन्धित है। इसकी विषयवस्तु में पर्याप्त विविधता पाई जाती है।

ध्वनि प्रदूषण से भौतिक विज्ञान जुड़ा है तो जल प्रदूषण का सम्बन्ध जल-विज्ञान जनस्वास्थ्य एवं आरोग्य यान्त्रिकी से है। मृदा प्रदूषण का सम्बन्ध मृदा-विज्ञान, कृषि-विज्ञान एवं भूगर्भ-शास्त्र से है तो औषधि विज्ञान से प्रदूषकों का स्वभाव जुड़ा है। वनस्पति विज्ञान एवं जीव विज्ञान की सहायता से पर्यावरण की पारिस्थितिकी का अध्ययन किया जा सकता है। अत: पर्यावरण के अध्ययन क्षेत्र की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। इस विषय के अन्तर्गत लगभग सभी विषयों का समावेश ही इसके शिक्षण की प्रमुख समस्या है।

CTET UPTET Problems Environment Teaching Study Material in Hindi

CTET UPTET TIER 2 Various Problems of Learning and Study of Environment Topics Stduy Material in Hindi

पर्यावरण विषय के शिक्षण एवं अध्ययन की विभिन्न समस्याएँ निम्नलिखित हैं-

  1. अनिवार्य विषय के रुप में न होना पर्यावरण विषय किसी भी कक्षा में अनिवार्य विषय के रुप में न होने के कारण छात्र एवं शिक्षक दोनों ही इस विषय के प्रति नीरसता का भाव व्यक्त करते हैं। पर्यावरण विषय के महत्व को न समझते हुए इसके प्रति अनुचित दृष्टिकोण रखते हैं। इस समस्या के निवारण के लिए पर्यावरण विषय को एक अनिवार्य विषय के रुप में सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए।
  2. पर्यावरण विषय के शिक्षण के शिक्षकों की समस्या पर्यावरण विषय के शिक्षकों के अभाव की प्रमुख समस्या भी उभर कर सामने आती है। व्यापक पाठ्यवस्तु के कारण कोई भी शिक्षक इसका शिक्षण भली-भाँति नहीं कर सकता। इस विषय के शिक्षण के लिए इसकी विषयवस्तु को सभी विषयों के अनुसार विभाजित करके अलग-अलग विषयों के शिक्षकों के द्वारा कराने से इस समस्या का निवारण सम्भव है।
  3. शिक्षण का समय एवं अवधि पर्यावरण विषय के शिक्षण के लिए कक्षाओं में पृथक् कालांश न होना और अतिरिक्त समय का उपलब्ध न होना भी इसकी समस्या है। सभी विषयों के शिक्षकों के द्वारा अपनी-अपनी विषयवस्तु पढ़ाने के लिए अधिक समय लगेगा, जो कि शिक्षकों को नहीं मिल पाता। इस समस्या से निवारण के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षकों को इस विषय के लिए पृथक् कालांश उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ शिक्षक अपने विषय के साथ सम्बन्धित करके इस विषय का शिक्षण कर सकते हैं।
  4. पर्यावरण के प्रति अनुचित जन-दृष्टिकोण सामान्य रुप से पर्याप्त ज्ञान के अभाव तथा शिक्षा के प्रसार की कमी के कारण जनसाधारण का पर्यावरण विषय के प्रति उचित दृष्टिकोण विकसित नहीं हो पाया है। जनसाधारण को नहीं पता कि उनके ही कुछ क्रियाकलापों से पर्यावरण कितना असन्तुलित हो रहा है, कितनी समस्याएँ उभर कर सामने आ रही हैं। पर्यावरण में होने वाली घटनाओं के प्रति सचेत न होने के कारण लोग पर्यावरण शिक्षा को अधिक महत्व नहीं दे रहे हैं।

Various Problems of Learning and Study of Environment Topics For SSC CGL TIER 2 

  1. पाठ्य सहगामी क्रियाओं का अभाव पर्यावरण की विषय-वस्तु विस्तृत होने के कारण, इसका शिक्षण केवल कक्षा शिक्षण के माध्यम से सम्भव नहीं है। अत: इस विषय के शिक्षण के लिए कक्षा शिक्षण के साथ-साथ अन्य पाठ्य सहगामी क्रियाओं को शिक्षण प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाना आवश्यक है। विद्यालयों में शिक्षकों के अभाव व धन के अभाव में शैक्षिक भ्रमण, सेमिनार, टोली शिक्षण जैसी पाठ्य सहगामी क्रियाओं का आयोजन सम्भव नहीं है।
  2. प्रभावशाली शिक्षण विधियों की समस्या स्वाभाविक तौर पर पर्यावरण ज्ञान प्राप्त करने में बालक कम रुचि लेते हैं। फलस्वरुप पर्यावरण अध्ययन की गति धीमी हो जाती है। आज पर्यावरणीय खतरे के मद्देनजर प्रभावशाली व उपयोगी शिक्षण विधियों के प्रतिपादन की आवश्यकता है। पर्यावरण अध्ययन के लिए इसी से सम्बन्धित अध्यापक की जरुरत है, ताकि बच्चे पर्यावरण के कारकों तथा उनके आपसी सम्बन्धों एवं प्रभावों दुष्प्रभावों का वास्तविक ज्ञान प्राप्त कर सकें। शिक्षण विधियों के साथ इनके कक्षा में आयोजित करने के लिए शिक्षकों को भी नवीन शिक्षण विधियों का ज्ञान सही प्रकार न होना भी आवश्यक है।
  3. बढ़ती जनसंख्या एवं आर्थिक समस्या पर्यावरण विषय को सिर्फ कक्षा शिक्षण के माध्यम से पढ़ाया जा सकता है। इसके शिक्षण के लिए विभिन्न प्रकार के क्रियाकलाप एवं प्रायोगिक कार्यों को छात्रों के साथ आयोजित करना आवश्यक है। किसी भी प्रकार के क्रिया कलाप एवं प्रायोगिक कार्य को करने के लिए शिक्षकों के समक्ष धन की समस्या आती है। अभिभावकों का इस विषय के प्रति जागरुक न होना तथा भ्रष्ट प्रशासन के कारण शिक्षक इस विषय का शिक्षण चाहते हुए अच्छी तरह से नहीं कर पाते।

SSC CGL TIER 2 Various Problems of Learning and Study of Environment Topics in Hindi

  1. भौतिकवादी दृष्टिकोण हमारे देश में भौतिकवादी दृष्टिकोण बढ़ता जा रहा है। व्यक्ति अपनी सुख-सुविधा के लिए नित नए उपकरणों को अपना रहा है। फलत: पर्यावरणीय समस्याएँ विकराल रुप धारण करने लगी हैं। व्यक्ति साधनों को अत्यधिक अपनाने की होड़ में पर्यावरण संरक्षण की बात भूलता जा रहा है।
  2. उपयोगी साहित्य की कमी की समस्या उपयोगी साहित्य का अभाव होने से पर्यावरण अध्ययन एवं इनके शिक्षण की समस्या गम्भीर हो रही है। पर्यावरण के प्रति हमारा संकुचित दृष्टिकोण होने के कारण पर्यावरण से सम्बन्धित साहित्यों की रचना नहीं हो सकी है।
  3. पर्यावरण्सा अध्ययन के पाठ्यक्रमों की उपयुक्त व्यवस्था न होना यह एक विशेष समस्या है। पर्यावरण अध्ययन के लिए पर्यावरणीय पाठ्यक्रम की उपयुक्त व्यवस्था की आवश्यकता है।
  4. संसाधनों का अभाव स्थानीय एवं विशिष्ट परिस्थितियों के आधार पर संसाधनों की उपलब्धता में कमी बनी हुई है। विद्यालय में सुसंगत संसाधन होने चाहिए ताकि उनका उपयोग कर पर्यावरण अध्ययन को बढ़ाया जा सके।
  5. विषय शिक्षकों की समस्या आज वैसे भी शिक्षकों की कमी प्राथमिक स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक बनी हुई है, ऐसे में पर्यावरण अध्ययन के लिए योग्य अध्यापक का मिलना मुश्किल है। पर्यावरण असन्तुलन का प्रभाव जितना गहरा होता जा रहा है उसके लिए योग्य अध्यापक की आवश्यकता है, क्योंकि एक योग्य अध्यापक ही पर्यावरण की शिक्षा बालकों तक पहुँचा सकता है।

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