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DElEd 1st Semester Science 3rd 4th Science Short Question Answer Paper

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प्रश्न 57. परागण प्रक्रिया को समझाइए।    (बी.टी.सी. 2015-II)

उत्तर–परागकोषों में परागकण बनने के पश्चात् यह जरूरी है कि परागकण के नर केन्द्रक मादा युग्मक (अण्ड) तक पहुँचे। पुष्प के परागकोष से परागकणों के उसी पुष्प अथवा दूसरे पौधों के किसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचने की क्रिया को परागण कहा जाता है। जब एक पुष्प के परागकोषों से परागकण निकलकर उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरकर अंकुरित हो जाते हैं तो यह क्रिया स्व-परागण कहलाती है जबकि किसी दूसरे पुष्प से उसी जाति के परागकण किसी दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिर जाते हैं तो इसे पर-परागण कहा जाता है। इसी प्रकार सभी एकलिंगी पुष्पों में पर-परागण होता है किन्तु द्विलिंगी पुष्पों में किसी भी प्रकार का परागण हो सकता है।

प्रश्न 58. सरल एवं संयुक्त पत्ती में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (डी.एल.एड. 2018)

उत्तर-     सरल एवं संयुक्त पत्ती में अन्तर

सरल पत्ती (Simple Leaf) संयुक्त पत्ती (Compound Leaf)
सरल पत्ती में केवल एक पर्ण फलक होता है। संयुक्त पत्ती में पर्ण फलक कई छोटे – छोटे पर्णकों में बँटा होता है।
सरल पत्ती के कक्ष में कम से कम एक कक्षस्थ कलिका या इससे बनी शाखा होता है। 2.इसमें पिच्छास (Rachis) के कक्ष में कलिका होती है। पर्णकों के कक्ष में कलिकाएं नहीं पायी जाती हैं।
इसके आधार पर अनुपर्ण हो सकते हैं।    3 पिच्छास के आधार पर अनुपर्ण हो सकते हैं, लेकिन पर्णकों के आधार नहीं पाये जाते हैं।

प्रश्न 59. बीजों के अंकुरण का नामांकित चित्र बनाइए। (बी.टी.सी. 2017)

उत्तर-बीज तत्काल अंकुरित नहीं होते हैं बल्कि कुछ समय तक प्रसुप्त रहते हैं, फिर उचित वातावरण में बीज अंकुरित होकर नये पौधे को जन्म देता है। इसके लिए जल, वाय एवं उचित ताप का होना अत्यन्त आवश्यक है। जल प्राप्त होने पर बीज फूल जाता है तथा तेजी से श्वसन आरम्भ कर देता है और बीजपत्रों या भ्रूण पोष में संचित भोजन को लेकर बढ़ना शुरू कर देता है। मूलांकुर बड़ा होने लगता है इसे प्रांकुर कहा जाता है।

चित्र-बीज का अंकुरण

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